
एनएसयूआई के कार्यकर्ताओ ने बताया कि 5 जनवरी को सकरी क्षेत्र स्थित शासकीय मिडिल स्कूल में एक आवारा कुत्ते ने कक्षा चौथी की छात्रा मोना यादव सहित चार बच्चों पर हमला कर दिया। इस घटना में तीन बच्चों को सिविल अस्पताल और एक बच्चे को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इससे पहले खमरिया और खमतराई के शासकीय स्कूलों में भी इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने भी सख्त टिप्पणी की है।एनएसयूआई का कहना है कि जिले के 1843 शासकीय विद्यालयों में से 495 स्कूल आज भी बिना बाउंड्रीवॉल के संचालित हो रहे हैं।

इसी कारण आवारा कुत्ते और मवेशी आसानी से स्कूल परिसरों में घुस जाते हैं और बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। हालात इतने गंभीर हैं कि सिविल अस्पताल बिलासपुर में प्रतिदिन 40 से अधिक लोगों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय और जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। एनएसयूआई ने मांग की है कि सभी स्कूलों में बाउंड्रीवॉल, गेट और फेंसिंग की व्यवस्था तत्काल की जाए, संवेदनशील स्कूलों में सुरक्षा बढ़ाई जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन लोकतांत्रिक और वैधानिक आंदोलन करने को मजबूर होगा।


