बहतराई के नाग नागिन तालाब के पास बनाई गई 29 दुकानों में से सभी का आवंटन नहीं किया गया, जिन लोगों को आवंटन किया गया उन्होंने सालों से किराया नही पटाया,इसकी जांच में पता चला कि क्षेत्र के पार्षद अमित सिंह ने फर्जी रसीद बनाई और दुकानदारो से किराया वसूल किया और उसे निगम में नहीं पटाया, शिकायत के बाद पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है उसके बाद से पार्षद फरार बताया जा रहा है। फरार पार्षद की पुलिस तलाश कर रही है जांच के बाद निगम अधिकारियों की भी पोल खुलने की संभावना है।



निगम के दुकान के किराया को लेकर रसीद फर्जीवाड़ा सामने आया है, इस फर्जीवाड़ा में क्षेत्र के कांग्रेसी पार्षद अमित सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुआ है। उसके बाद से पार्षद फरार है। फर्जी रसीद से पार्षद ने दुकानदारों से 15,700 के हिसाब से वसूली कर ली हैं, जांच में फिलहाल दुकानदारों से एक लाख ₹65,000 की वसूली का मामला सामने आया है। नगर निगम ने पीएम आवास किराएदार योजना के तहत लोगों को जो 900 रुपए की रसीद दी थी इस आधार पर दुकानों से वसूली हुई है, फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पार्षद फरार है इस मामले को लेकर निगम के पदाधिकारी ने भी कहा कि अभी निगम में कांग्रेस के पार्षद महापौर है इसलिए पुलिस भी इस पर कार्यवाही नहीं कर रही है, और ना ही मामले की जांच ठीक से हो रही है क्योंकि मामला जांच के बाद राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा लेकिन अब तक वहां मामला ही नहीं भेजा गया है जो घोर लापरवाही को दिखाता है।



गौरतलब है कि पार्षद अमित के खिलाफ एफ आई आर फिर हो चुकी है, दुकानों के नाम पर आवंटन और किराया नहीं लेने पर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वालंबन योजना के तहत निगम ने शहर में अलग-अलग जगह पर दुकानें बनाई है, जिनमें 29 दुकान बहतराई के नाग नागिन तालाब के पास 1994 में बनाई गई थी। गरीबों को रोजगार के लिए यह दुकान किराए पर दी गई थी, शुरुआत में इन दुकानों का सिर्फ ₹800 किराया था बाद में इसमें 15% की वृद्धि की गई। दुकानदार निगम को पिछले कई साल से किराया ही नहीं दे रहे हैं, इसका फायदा उठाते हुए पार्षद अमित सिंह निगम के नाम से फर्जी रसीद बना कर दुकानदारों से किराया वसूल करने लगा और उसकी राशि निगम में जमा नहीं हुई, शिकायत पर जब इसकी जांच की गई तो फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद से पार्षद फरार है वही इस पूरे मामले में निगम के अधिकारियों पर भी आरोप लग रहे हैं। अब जांच के बाद ही मामला साफ हो सकेगा कि इस फर्जीवाड़ा में और किसका कसक हाथ है।


