बालाजी सिटी में आकर्षक जमीन दिखाकर 8 लाख 95 हजार रुपये ले लिए। फिर ना तो जमीन की रजिस्ट्री की और ना ही रुपए लौटाए। अब रुपए वापस मांगने पर बिल्डर तरह-तरह की धमकी दे रहा है। पीड़ित परिवार ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों के समक्ष आपबीती सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना मकान या जमीन हो। लोग भी कहते हैं की जमीन में निवेश करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है लेकिन कई बार गलत व्यक्ति से सौदा होने पर यह जी का जंजाल बन जाता है। इसी परेशानी से रूबरू हो रहे पीड़ितों ने बिलासपुर प्रेस क्लब के माध्यम से मीडिया के समक्ष अपना दुखड़ा सुनाया। समरेश गोप के पास साल 2021 में एक कॉल आया था जिसमें उन्हें कोनी स्थित बालाजी सिटी में एक आकर्षक प्लॉट लेने का ऑफर किया गया था। बिलासपुर आकर उन्होंने रतनपुर बिलासपुर मार्ग सेंदरी में पटवारी हल्का नंबर 46 स्थित खसरा नंबर 326 बटा 02, रकबा 2. 06 एकड़ यानी 900 वर्ग फीट जमीन पसंद की और इसका 12 लाख 15000 रुपए में सौदा हुआ।


जिसके बाद राज बिल्डर्स के ओनर धीरेंद्र पांडे और कंपनी के मैनेजर सूरज जायसवाल एवं सौरभ शुक्ला के साथ बाकायदा बिक्री नामा तैयार हुआ। इस जमीन के सौदे में कैश और चेक के रूप में 8 लाख 95000 रु दिए गए, लेकिन फिर ना तो जमीन की रजिस्ट्री हुई और ना ही यह रकम लौटाई गई। जब इसकी शिकायत की गई तो धीरेंद्र पांडे और उसके लोगों द्वारा धमकी दी जाने लगी। पुलिस में शिकायत की गई। जिसके बाद मामला वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार को धमकाया जाने लगा। समरेश गोप और उनके परिजनों को घर जाकर उन्हें तरह-तरह से धमका कर डराया गया। पुलिस में इसकी शिकायत का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस ने कोई मदद नही की, जिसके बाद एसपी से गुहार लगानी पड़ी। एसपी के निर्देश पर अपराध तो दर्ज हुआ लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे आरोपी लगातार पीड़ित पक्ष को धमकाता रहा। एक तो 8 लाख 95 हजार डूब गए और ऊपर से लगातार धमकी मिल रही है। पुलिस भी कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। समरेश गोप ने बताया कि धीरेंद्र पांडे और उनके लोग लगातार कह रहे हैं कि कॉन्ट्रैक्ट की मियाद खत्म हो चुकी है इसलिए उन्हें कुछ नहीं मिलेगा। हर संभव दरवाजे पर दस्तक देने के बाद भी जब फरियाद नहीं सुनी गई तो पीड़ित परिवार बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचा और वहां पत्रकारों के समक्ष आपबीती सुनाई।

समरेश गोप और उनके परिजनों ने बताया कि उक्त भूमि दीपक, संतोषी, सुनीता पिंकी, पुष्पा आदि के नाम दर्ज है। यह भूमि राज बिल्डर्स के नाम दर्ज नहीं है, जिन्होंने फर्जीवाड़ा करते हुए इकरारनामा बनाया। जाहिर है वे रजिस्ट्री नहीं कर पाए लेकिन एडवांस में दी हुई रकम भी वापस नहीं कर रहे। इस फर्जीवाड़ी में शामिल सूरज जायसवाल तो राज बिल्डर की नौकरी भी छोड़ चुका है। कुल 8 लाख 95 हजार की ठगी के मामले में पुलिस से कोई राहत नहीं मिलने के बाद पीड़ित परिवार अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। वैसे यह कोई अपने आप में अकेला मामला नहीं है।

ऐसे ही ना जाने कितने मामले इस शहर में है, जहां बाहुबली भूमाफिया इसी तरह सीधे-साधे लोगों को अपनी मकड़ जाल में फंसा कर उन्हें इसी तरह लूट रहे हैं। पहले तो उन्हें फूल डेवलप्ड कॉलोनी का सपना दिखाया जाता है, फिर उनसे रकम ले ली जाती है। उसके बाद दुर्व्यवहार का सिलसिला शुरू हो जाता है। छोटे-छोटे मामले में भी सख्ती बरतने वाली पुलिस न जाने ऐसे मामलों में क्यों बेबस हो जाती है। सत्ताधारी भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद वह ऐसे भू माफियाओं पर नकेल कसेगी, लेकिन समरेश गोप जैसे पीड़ित परिवार नजीर है कि सच में ऐसा कुछ नहीं हो रहा। तो क्या सचमुच राज बिल्डर्स के लोग इतने ताकतवर है, जिनके आगे मीडिया, पुलिस, प्रशासन सब बेबस है?



