गर्मी में बिजली के खम्बो में करंट की समस्या बढ़ जाती है। उसके बावजूद भी बिजली विभाग लापरवाही बरत रहा है। कर्मचारियों को बिना सुरक्षा उपकरण ही खंबे पर चढ़ाया जा रहा है। इससे उनकी जान जाने का खतरा बना हुआ है। मेंटेनेंस के नाम पर अभी बिजली तारों में सुधार कार्य चल रहा है, जबकि बिना ग्लव्स और जूते के कर्मचारी नंगे तारों के साथ काम कर रहे हैं। उनमें भी विभाग के प्रति आक्रोश है, बिना सुरक्षा उपकरण के ही पोल में चढ़ाए जाने की शिकायत कर्मचारी कर रहे हैं।

बिजली विभाग और ठेकेदारों की लापरवाही से मजदूरों, कर्मचारियों के सामने जान की संकट आ खड़ी हुई है। बिना सुरक्षा उपकरण के ही कर्मचारियों को बिजली के खंभे पर चढ़ाया जा रहा है, जबकि गर्मी के मौसम में तापमान अधिक होने से करंट लगने की आशंका बढ़ जाती है। उसके बाद भी नंगे हाथ कर्मचारियों को बिजली के खंभे में सुधार कार्य करते देखा जा सकता है जबकि खंभा भी लोहे का है इसमें करंट तेजी से और जल्दी प्रवाहित होता है। ऐसे में कर्मचारियों के साथ कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। कर्मचारियों का भी कहना है कि हमें किसी प्रकार का बचाव उपकरण नहीं दिया जाता। ना ही ग्लव्स दिए जाते हैं, ना ही चमड़े का जूता दिया जाता है। मजबूरी में हमें काम करना पड़ रहा है।



ऐसे दृश्य अमूमन हर जगह देखे जा सकते हैं, लेकिन गर्मी के दिनों में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। बिजली के खंभे में चढ़ने से पहले हाथ में ग्लव्स और पैरों में चमड़े का जूता होना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो करंट लगने पर जान भी जा सकती है। आये दिन हादसे सुनने और देखने को मिलते है। उसके बावजूद भी बिजली विभाग द्वारा बिना उपकरण के ही कर्मचारियों को काम पर भेजा जा रहा है। नंगे तारों के बीच कर्मचारी काम करने मजबूर हैं। उनमें भी करंट का डर बना रहता है लेकिन रोजी-रोटी के चलते मजबूरी में करंट के बीच काम कर रहे है। बिजली विभाग को फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को सारे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।





