कलेक्टोरेट का प्रतीक्षालय जल्दी ही नए लुक में नजर आएगा। प्रतीक्षालय में बापू के साथ उनके अनुयायी दांडी मार्च करते नजर आएंगे। मंथन सभाकक्ष के सामने बापू की बैठी हुई बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई थी। अब एक और प्रतिमा कलेक्टोरेट में रहेगी। वहीं सुदूर क्षेत्रों से अपने कार्यों को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचने वालों को उद्यान के साथ छायादार बैठक की सुविधा मिलेगी। दो प्रतीक्षालय, उद्यान, फाउंटेन और आकर्षक सदाबहार फूलों के पौधे, लॉन की घास लगाई जा रही हैं, यहां चल रहा निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इसे जुलाई में पब्लिक के लिए खोल दिया जाएगा।

निगम के मुताबिक कलेक्टोरेट के प्रतीक्षालय, उद्यान औरफाउंटेन के निर्माण में 94 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए राशि डीएमएफ से स्वीकृत की गई है। प्रतीक्षालय के निर्माण का कार्य अगले माह पूरा हो जाएगा। इसके बाद यहां पहुंचने वालों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

गौरतलब हैं कि महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 79 अनुयायियों के साथ दांडी मार्च प्रारंभ किया। 241 मील की दूरी 24 दिन में पूरी कर दांडी के तटीय शहर पहुंचे। वहां अरब सागर के जल से नमक बनाया था। उन्होंने ब्रिटिश नीति के नमक कानून का अहिंसात्मक ढंग से विरोध किया था। कलेक्टोरेट में अब लोगों को बापू के नमक सत्याग्रह की याद आएगी।




