बिलासपुर जिले में मलेरिया और डायरिया के बढ़ते ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने दौरा कर दिए आवश्यक दिशा निर्देश।

बिलासपुर जिले में अब भी लगातार मलेरिया और डायरिया के मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है जबकि मलेरिया और डायरिया के रोकथाम को लेकर शासन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में पूरी ताकत झोंक दी है। फिर भी इसपर अब तक नियंत्रण नही पाया गया है। गौरतलब है कि कोटा ब्लाक के 50 से अधिक गांव मलेरिया के लिए अति संवेदनशील हैं। इस बार इन गांवों में एक के बाद एक मलेरिया के मरीज मिलते ही जा रहे हैं। अब तक लगभग 20 से ज्यादा संवेदनशील गांवों में मलेरिया के मरीज मिल चुके हैं। बुधवार की देर शाम तक भी ग्राम बंगलाभाठा, बारीघाट, केराछुआ, केंदा, बेलगहना, शिवतराई और चपोरा से तकरीबन एक दर्जन नए मरीजों की पहचान की गई, जिसमें से सामान्य मरीजो का स्वास्थ्य केंद्र में वहीं गम्भीर मरीजों का सिम्स में इलाज किया जा रहा है।

इसी तरह रतनपुर में डायरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को 20 नए मरीजो की पहचान की गई है। अब रतनपुर क्षेत्र से 328 मरीज मिल चुके हैं। अभी भी 27 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं 19 गंभीर मरीजों को हायर सिस्टम में रेफर किया गया है। रतनपुर के लगभग सभी मोहल्लों से डायरिया के मरीज मिल रहे हैं और क्षेत्र में अभी भी डायरिया को लेकर स्थिति बिगड़ी हुई है। फिलहाल कोरोना काल की तरह डायरिया और मलेरिया जैसे माहौल और विकट परिस्थितियों में भी डॉक्टरों का अमला पहुंच विहीन गांवों में कैम्प लगाकर डटा हुआ है। नदी, बड़े नहरों को पार कर भारी समस्याओं का सामना कर मोबाइल वैन से जांच करने के साथ साथ प्रभावी क्षेत्रों में शिविर लगाकर मच्छर रोधी दवाएं, क्लोरीन टेबलेट वितरण कर छिड़काव भी किया जा रहा है।

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