
बिलासपुर ट्रेन हादसे को भले ही कई दिन बीत गए हों, लेकिन जख्म अब भी ताज़ा हैं। हादसे में घायल और मृतकों के परिवारों की पीड़ा आज भी खत्म नहीं हुई। रेलवे ने राहत और मुआवजे की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है, मगर राज्य शासन की ओर से घोषित आर्थिक सहायता अब तक अधूरी है। परिवार अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शासन का वादा कब पूरा होगा। रेल प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए अधिकांश प्रभावितों को मुआवजा राशि बांट दी है। कई घायलों को इलाज के खर्च सहित सहायता राशि मिल चुकी है। लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, वे अब भी राज्य सरकार की आर्थिक मदद की राह देख रहे हैं। दर्दनाक हादसे की यादें उन्हें हर दिन झकझोर देती हैं।हादसे के एक चश्मदीद ने बताया मैं अकलतरा से ट्रेन में चढ़ा था, जैसे ही गातारा पहुंचने वाले थे, जोरदार धमाका हुआ और सबकुछ बिखर गया। आंख खुली तो हर तरफ अफरा-तफरी थी। चारों तरफ लाशें, खून और चीत्कारें थीं। मैं खुद भी घायल था, पर किसी तरह बाहर निकला।

यह बयान उस मंजर की भयावहता बयां करता है, जिसे भुलाना आसान नहीं।इन्ही में एक शहर के रहने वाले सख्स डीआरएम कार्यालय पहुंचे जिन्होंने बताया कि रेल हादसे में उनके तीन सदस्यों की मृत्यु हो गई इनका मुआवजा लेने वे डीआरएम कार्यालय पहुंचे है।घायलों ने कहा सरकार ने भरोसा दिलाया था कि सबकी मदद की जाएगी, लेकिन अब तक कोई खबर नहीं आई। हम जैसे लोग मानसिक रूप से भी टूट चुके हैं।विश्वकर्मा परिवार के चार सदस्य हादसे में घायल हुए थे। परिवार आज भी उस दिन को याद कर सिहर उठता है। उनका कहना है कि रेलवे की मदद से इलाज तो हो गया, लेकिन राज्य सरकार की ओर से घोषित सहायता का पैसा अब तक नहीं पहुंचा। प्रशासनिक देरी अब उनके लिए एक नई पीड़ा बन चुकी है। पीड़ितों की मांग है कि शासन जल्द से जल्द वादा निभाए। हादसे की वह रात उनके लिए कभी न भूलने वाली है, पर अगर वादा पूरा हो जाए तो कम से कम उन्हें यह अहसास होगा कि शासन-प्रशासन ने उनकी पीड़ा को समझा।वे कहते हैं हम सिर्फ पैसे नहीं, अपने दुख की संवेदना चाहते हैं।


