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बिलासपुर में आगामी गणेश उत्सव, दुर्गा उत्सव के आयोजन और विसर्जन पर गहराते संकट को लेकर विभिन्न समितियों ने बैठक आयोजित कर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का लिया निर्णय।

बिलासपुर में आगामी गणेश उत्सव, दुर्गा उत्सव के आयोजन और विसर्जन पर गहराते संकट को लेकर विभिन्न समितियो ने तेलीपारा में बैठक आयोजित की, जहां परंपराओं पर गहराते संकट पर चिंता प्रकट करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया गया।

शनिवार को बिलासपुर के सभी गणेश उत्सव समिति, दुर्गा समिति, डीजे, धुमाल संघ की बैठक तेलीपारा में आयोजित हुई, जहां आगामी विसर्जन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की गई। सभी ने प्रशासनिक भेदभाव का आरोप लगाया। कहा गया कि केवल हिंदू त्योहारों पर ही तमाम सख्ती बरती जा रही है, जिससे परंपराएं खत्म होने की कगार पर है। बिलासपुर में भी गणेश और दुर्गा विसर्जन पूरे रात करने की ऐतिहासिक परंपरा रही है लेकिन नए नियम कायदों के कारण इस पर खतरा मंडराने लगा है। हाई कोर्ट द्वारा भी रात 10:00 बजे के बाद डीजे और वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है । वही पुलिस प्रशासन इसकी अनुमति नहीं दे रहा। ऐसे में ना तो पंडाली में वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जा सकेगा और ना ही विसर्जन के दौरान इनका उपयोग संभव होगा। जिससे दुर्गा, गणेश प्रतिमा विसर्जन एवं झांकी का असली आनंद ही जाता रहेगा। इसे लेकर हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई पाबंदी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगाने का निर्णय लिया गया है।

बिलासपुर में गणेश और दुर्गा उत्सव की प्राचीन परंपरा रही है। इस अवसर पर पंडाल में लगाए गए वाद्य यंत्रों के सहारे भजनों और गीतों का प्रसारण होता था। वही विसर्जन के समय बैंड बाजे का प्रयोग होता था, लेकिन समय के साथ बदलाव होता गया और उसकी जगह धूमाल ने ले लिया। फिर आ गया डीजे। लेकिन इसकी ध्वनि की तीव्रता इतनी तेज है कि यह लोगों के लिए असहनीय होने लगा। खासकर जब विसर्जन के लिए यह शहर की गलियों से गुजरता है तो वहां घरों की खिड़कियां दरवाजे कांपने लगते हैं। दिल के मरीजो पर प्राणों का संकट गहराने लगता है, इसलिए हाईकोर्ट ने भी एक निश्चित सीमा से अधिक डेसीबल पर डीजे या वाद्य यंत्र बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा रात 10:00 बजे के बाद भी इसका प्रयोग वर्जित है, जिसे लेकर यहां उत्सव समिति, डीजे और धुमाल संघ ने अपनी चिंता जाहिर की। साथ ही यह भी कहा गया कि बिलासपुर में पचरी घाट पर मुख्य रूप से प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता था, लेकिन यहां बैराज बन जाने से अब इस पर भी संकट गहराने लगा है, इसलिए विसर्जन के लिए भी इसी क्षेत्र में किसी और घाट की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है, जिसे लेकर प्रशासन को अवगत कराने और हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया गया है।

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