बिलासपुर में चावल वितरण घोटाला: नागरिक आपूर्ति निगम लिंगियाडीह के खिलाफ हुई जांच में मिली लापरवाही शासन को भारी नुकसान नापतोल, खाद्य विभाग और प्रशासन की मिलीभगत से दुकानों तक कम वजन का चावल पहुँच रहा बिलासपुर

शासकीय उचित मूल्य दुकानों तक चावल की आपूर्ति में गंभीर गड़बड़ी उजागर हुई है। बुधवार को नापतोल और खाद्य विभाग की टीम ने नागरिक आपूर्ति निगम लिंगियाडीह में जांच की, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच के दौरान केवल खान-पूर्ति दिखाई गई और वास्तविक गड़बड़ियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शासकीय दुकानदार संघ के पदाधिकारियों एवं शिकायतकर्ताओं ने बताया कि प्रत्येक बोरी में 50 किलो और 580 ग्राम चावल होना चाहिए, लेकिन दुकानों तक केवल 47-48 किलो ही पहुंचा।शिकायत के बाद नापतोल और खाद्य विभाग की टीम पहुंची, लेकिन जांच शुरू से लेकर अंत तक केवल खान-पूर्ति ही की गई, जबकि वास्तविक चावल की मात्रा और गोदाम प्रबंधन में गड़बड़ी पर ध्यान नहीं दिया गया।दुकानदार संघ के जिलाध्यक्ष रवि परियानी ने कहा कि गाड़ी में भेजे गए चावल और दुकानों पर मिले चावल में 40 से 50 किलो का अंतर पाया गया। शिकायत करने के बाद भी नागरिक आपूर्ति निगम लिंगियाडीह ने अधिकारियों की गैरमौजूदगी में पहले ही गुप्त जांच कर ली थी,जो नियमों के खिलाफ है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नापतोल और खाद्य विभाग की टीम मौके पर थी, लेकिन उनके द्वारा किए गए निरीक्षण में वास्तविक समस्या को नजरअंदाज किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने एफसीआई के पक्ष में मिलीभगत की और शासन को होने वाले नुकसान पर ध्यान नहीं दिया।इसके चलते दुकानदारों को भी नुकसान हुआ। एक दुकानदार को सस्पेंड कर दिया गया, जिससे उसके परिवार और दुकान को प्रत्यक्ष झटका लगा। संघ का कहना है कि यह गड़बड़ी लंबे समय से हो रही थी और यदि समय रहते सही जांच होती तो प्रशासन और शासन को लाखों किलो चावल के नुकसान से बचाया जा सकता था।जांच टीम ने गोदाम में चावल के टोल और तौल बांट की भी जांच की, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह सिर्फ दिखावा था। असली गड़बड़ियों पर ध्यान नहीं दिया गया और नागरिक आपूर्ति निगम लिंगियाडीह प्रबंधक ने बिना अधिकारियों की मौजूदगी में पहले ही छुप-छुपकर जांच कर ली थी।नापतोल और खाद्य विभाग की टीम की यह लापरवाही अब विवाद का विषय बन गई है।

दुकानदार संघ का कहना है कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद वे कड़ा आंदोलन करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।नापतोल विभाग के अधिकारी से भी जी न्यूज़ की टीम ने बातचीत की, लेकिन अधिकारी ने बार-बार जांच करने का हवाला देते हुए गोल-गोल जवाब दिए। उनका यह रवैया न केवल शासन और प्रशासन को इस मामले में अंधेरे में रखने वाला था, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि विभाग ने वास्तविक गड़बड़ियों और सच्चाई को जानबूझकर छुपाया। कुल मिलाकर यह मामला नागरिक आपूर्ति निगम लिंगियाडीह, खाद्य विभाग, नापतोल और जिला प्रशासन की मिलीभगत और लापरवाही को उजागर करता है। लंबे समय से हो रही चावल की गड़बड़ी से शासन को भारी नुकसान हो रहा है, जबकि उचित मूल्य की दुकानों तक राशन सही मात्रा में नहीं पहुंच रहा।फिलहाल अब पूरी कार्यवाही जांच रिपोर्ट पर ही टिकी है।देखने वाली बात होगी कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी या फिर हमेशा की तरह उन्हें बचा लिया जायेगा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
21,600SubscribersSubscribe
spot_img

Latest Articles