बिलासपुर में फैले मौसमी बीमारी के प्रकोप से हुई मौतों पर स्वास्थ्य मंत्री और सीएमएचओ रिपोर्ट में विभेद।

बिलासपुर और आसपास डायरिया एवं मलेरिया का प्रकोप है ,अब तक जिले में डायरिया से तीन और मलेरिया से पांच मौते हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री इसे नकार रहे हैं।

बरसात आते ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डायरिया का प्रकोप बढ़ गया है, जिसके साथ मलेरिया ने भी परेशानी दुगुनी कर दी है। इस बार बिल्हा, रतनपुर, मस्तूरी और बिलासपुर शहरी क्षेत्र में डायरिया का प्रकोप देखा जा रहा है। खासकर रतनपुर में तो सैकड़ो डायरिया प्रभावित सामने आ चुके हैं। रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन मरीजों से अटा पड़ा है। ग्रामीण और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक डायरिया से तीन मौते हो चुकी है तो वहीं मलेरिया प्रभावित पांच लोग काल के गाल में समा गए हैं। लेकिन इस रविवार को बिलासपुर पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि डायरिया से एक भी मौत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जिन मौतों को डायरिया से हुई मौत बताया जा रहा था पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई। हालांकि वे यह मान रहे हैं कि प्रदेश में अब तक मलेरिया के चलते 15 जान जा चुकी है, लेकिन वे साथ मे यह भी जोड़ते हैं कि पूर्ववर्ती सरकारों में यह आंकड़े दोगुने हुआ करते थे।

यह चौंकाने वाली बात है क्योंकि अब तक प्रदेश का स्वास्थ्य अमला खुद कह रहा था कि डायरिया से तीन मौते हो चुकी है और अब भी सीएमएचओ पुष्टि कर रहे हैं कि मस्तूरी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम बूढ़ी खार में रहने वाले राजकुमार कैवर्त्य के तीन बच्चों में से एक वीर कैवर्त्य की मौत डायरिया के चलते ही हुई है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री इससे इनकार कर रहे हैं, यानी स्वास्थ्य विभाग और मंत्री के बयानों में एकरूपता नहीं है।

ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि मंत्री गलत कह रहे हैं या फिर सीएमएचओ झूठी जानकारी दे रहे हैं। इधर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल यह कहने से नहीं चूकते कि कांग्रेस की 5 साल की सरकार की तुलना में पिछले 6 महीने में सिम्स और अन्य अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां डायरिया और मलेरिया का प्रकोप है, वहां वहां रैपिड एक्शन टीम तुरंत पहुंची है और सरकार की पहली प्राथमिकता है कि इन मौसमी बीमारियों से किसी की जान नहीं जाए लेकिन डायरिया से हुई मौतों पर मंत्री और सीएमएचओ के अलग अलग बयान से संदेह गहरा रहा है कि वास्तविकता क्या है।

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