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बिलासपुर रेल हादसे में ट्रेन चालक सहित दोषियों पर एफआईआर दर्ज,जांच का दायरा बढ़ा, रेलवे की तकनीकी लापरवाही पर उठे सवाल

बिलासपुर रेल हादसे की जांच अब नए मोड़ पर पहुँच गई है। हादसे के बाद तोरवा थाना पुलिस ने ट्रेन चालक विद्यासागर और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर रेलवे से मिले मेमो के आधार पर दर्ज की गई है, जिसमें हादसे को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया गया है। अब जांच का फोकस रेलवे के अंदरूनी तकनीकी तंत्र और सिग्नलिंग सिस्टम पर केंद्रित हो गया है। 4 नवंबर की शाम हुए इस भीषण हादसे में मेमू लोकल ट्रेन ने खड़ी मालगाड़ी को टक्कर मार दी थी, जिसमें 11 यात्रियों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद रेलवे और पुलिस दोनों ने अलग-अलग जांच शुरू की थी। अब पुलिस ने चालक विद्यासागर को भी एफआईआर में शामिल किया है, हालांकि उनकी मौत घटना स्थल पर ही हो चुकी थी।एफआईआर में रेलवे एक्ट की गम्भीर एवं गैरजमानती धाराओं लगाई गई हैं। ये धाराएं रेल संपत्ति को नुकसान, संचालन में बाधा और गंभीर लापरवाही जैसे अपराधों से जुड़ी हैं। पुलिस के अनुसार, जांच के बाद ही तय होगा कि हादसे का असली जिम्मेदार कौन था चालक, सिग्नलिंग सिस्टम या किसी अन्य तकनीकी विभाग की गलती।रेलवे सूत्रों के मुताबिक, हादसे की तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें सिग्नलिंग सिस्टम, लाइन क्लियरेंस, ब्रेकिंग मैकेनिज़्म और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड्स की जांच शामिल है।

प्रशासन ने स्टेशन अधीक्षक, कंट्रोल ऑफिस और तकनीकी स्टाफ से भी विस्तृत जवाब तलब किया है।सूत्र बताते हैं कि जांच टीम ने ट्रेन का ब्लैक बॉक्स और सिग्नल डेटा रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि क्या चालक को सही समय पर चेतावनी मिली थी या सिग्नल सिस्टम ने फेल होकर गलत इनपुट दिया। रेलवे का कहना है कि तकनीकी त्रुटि और मानवीय गलती दोनों संभावनाओं पर जांच चल रही है।एएसपी ने बताया कि रेल प्रशासन के मोम के आधार पर मृतक ट्रेन चालक सहित तमाम दोषियों के खिलाफ एफआईआर किया गया है जिनके चलते एक बड़ा ट्रेन हादसा हुआ जिसमें 11 लोगों की मौत होने के साथ-साथ 20 से अधिक घायल हो गए। फिलहाल बिलासपुर रेल हादसे की जांच कई स्तरों पर तेज़ी से जारी है। पुलिस और रेलवे की संयुक्त टीम यह पता लगाने की कोशिश में है कि गलती मशीन की थी, सिस्टम की या किसी इंसान की लापरवाही की। अब सबकी निगाहें उस फाइनल जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि 11 निर्दोष जिंदगियाँ आखिर किसकी गलती से खत्म हुईं चालक विद्यासागर की या फिर रेलवे सिस्टम की।

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