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बीमारी का इलाज तंत्र-मंत्र में ढूंढने वाली बिलासपुर की महिला बनी साइबर ठगों की शिकार, गंवाए करीब 37 लाख रुपये।

स्वास्थ्य खराब होने पर इलाज कराने की बजाय तंत्र-मंत्र से ठीक होने की लालसा में महिला ठगी का शिकार हो गई। ठगों ने महिला को शीशे में उतारते हुए करीब 37 लाख रुपए ठग लिए, तब जाकर महिला की नींद खुली।

बिलासपुर पुलिस चेतना 2.0 अभियान के तहत साइबर ठगों पर प्रहार कर रही है, यह जरूरी भी है क्योंकि नित नए पैंतरे के साथ ठग लोगों को झांसे में लेने की तरकीब ढूंढ लेते हैं ।इधर बिलासपुर सरकंडा क्षेत्र में रहने वाली एक महिला बीमार पड़ने पर किसी अच्छे चिकित्सक से इलाज कराने की बजाय तंत्र-मंत्र में इलाज ढूंढने लगी। सोन गंगा कॉलोनी सरकंडा में रहने वाली महिला बीमार हुई तो फिर उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी ज्योतिषी जानकारी के लिए गूगल के माध्यम से हनुमंत niketan.com साइट से संपर्क किया। जब वह इस साइट पर सर्च कर रही थी तो उनके पास एक अनजाने नंबर से कॉल आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि आशीष त्रिपाठी नाम के व्यक्ति के खाते में ₹3350 जमा करने पर उनके नाम से हवन पूजन किया जाएगा और वह पूरी तरह ठीक हो जाएगी। जब महिला उनके झांसे में आ गई तो हवन, पूजन, दान दक्षिणा, गोदान, विंध्यवासिनी दान, मारन क्रिया दान, बंधक क्रिया दान, सुरक्षा कवच दान जैसे ना जाने कितने नाम से उन्हें झांसा देते हुए उनका भयादोहन करते हुए ठगों ने 36 लाख 73 हजार रुपए ठग लिए। इसके बाद भी वे नहीं रुके और लगातार पैसों की मांग करते रहे।

करीब 37 लाख रुपए ठगे जाने के बाद जाकर महिला को एहसास हुआ कि यह कोई चमत्कारी बाबा नहीं बल्कि साइबर फ्रॉड है, जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत सरकंडा थाने में की। सरकंडा पुलिस और एसीसीयू बिलासपुर की टीम ने इस मामले में जांच शुरू की तो फोन नंबर, पैसे ट्रांजैक्शन वाले खाते की जांच से लिंक प्रयागराज का मिला, जिसके बाद एक टीम प्रयागराज रवाना हुई। जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि यह आरोपी ऑनलाइन ठगी का काम करते हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से बिलासपुर पुलिस ने ममपोडगंज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश निवासी मात्र 22 वर्षीय आशीष त्रिपाठी उर्फ अभिनव त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। यह ठग ग्रह शांति, अच्छी नौकरी, स्वास्थ्य लाभ दिलाने का झांसा देकर ऑनलाइन हवन पूजा पाठ करने का झांसा देकर ठगी किया करता था। पुलिस बैंक स्टेटमेंट, एटीएम फुटेज की मदद से उस तक पहुंच पाई।

इस मामले में पुलिस आरोपी तक पहुंच गई लेकिन ज्यादातर मामलों में पुलिस का आरोपियों तक पहुंचना भी आसान नहीं होता। इसलिए पुलिस का मानना है कि सावधानी ही समाधान है। चूंकि साइबर फ्रॉड आए दिन नए-नए तरीकों से जनता से धोखाधड़ी कर रहे हैं इसलिए लोगों को भी सचेत और अपडेट रहना होगा। अगर कोई भी अनजान व्यक्ति अनजान नंबर से अपने आप को पुलिस का अधिकारी, सीबीआई अथवा ईडी का अधिकारी बताकर पैसों की मांग करें तो फिर इसकी सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन में दिया जाना चाहिए। अंजान मोबाइल नंबर के साथ बेवजह की बातचीत, निजी जानकारी, बैंकिंग जानकारी ,ओटीपी, आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि शेयर करने से भी बचने की सलाह दी गई है। साथ ही पुलिस ने कहा कि अनजान वेबसाइट और अनाधिकृत ऐप डाउनलोड या सर्च करने से भी बचने की जरूरत है। कम परिश्रम से अधिक लाभ कमाने, रकम दुगना करने के प्रलोभन में ही अक्सर लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे लोग खुद ही ठगो के जाल में फंस जाते हैं, इसलिए इनसे दूर रहने की जरूरत है, पुलिस ने आम लोगों को भी आगाह करते हुए कहा कि खुद की पहचान छुपा कर सोशल मीडिया फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप आदि पर असली लाइव चैट से भी बचना चाहिए, क्योंकि इसी से सेक्स टॉर्शन की शुरुआत होती है।

कई बार परीक्षा में अधिक नंबरों से पास कर देने का झांसा देकर भी ठगी की जाती है। खासकर प्लस 92 नंबरों से आने वाले व्हाट्सएप कॉल से बचना चाहिए। किसी भी जरूरत के लिए गूगल सर्च इंजन पर कस्टमर केयर नंबर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह अधिकांश नंबर फिशिंग होते हैं और यह फ्रॉड के नंबर होते हैं। अनजान व्यक्तियों द्वारा बताए गए किसी भी ऐप को डाउनलोड नहीं करना है, ना ही उनके बताए लिंक पर क्लिक करना है, क्योंकि इससे फोन की सभी जानकारियां उन तक पहुंच जाती है। इस तरह की ठगी का शिकार होने पर नजदीकी थाना में शिकायत करने या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर मदद मांगने की बात पुलिस ने कही है। ऐसे मामलों में ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है, जिसके लिए साइबर क्राइम डॉट gov.in पर संपर्क किया जा सकता है।

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