
भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा के प्रतीक पर्व भाई दूज आज पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। दिवाली के पांचवें दिन मनाए जाने वाले इस पर्व का लोगों ने बड़ी उत्सुकता से इंतजार किया। सुबह से ही घरों में तैयारियां शुरू हो गईं। बहनों ने थाल सजाए, आरती की और भाइयों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई।

भाई दूज का यह पर्व हर साल कार्तिक मास की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन यमराज अपनी बहन यमी के घर आए थे, जहाँ उन्होंने तिलक और सत्कार प्राप्त किया। तभी से यह पर्व भाई-बहन के पवित्र संबंध का प्रतीक बन गया। इस दिन बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश में भाई दूज का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

सुबह से ही बाजारों में रौनक रही। मिठाइयों, सूखे मेवों और उपहारों की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी। बहनों ने भाई के माथे पर तिलक लगाया और आरती उतारकर अपने स्नेह का इज़हार किया। बदले में भाइयों ने भी बहनों को उपहार देकर स्नेह और सुरक्षा का वचन दिया। त्योहार को लेकर शहर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। कई परिवारों ने घरों में भी विधिवत पूजा का आयोजन किया।

बच्चों में भी पर्व को लेकर उत्साह देखने को मिला। छोटे भाई-बहनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और साथ में सेल्फी लेकर यादगार पल संजोए। भाई दूज का पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक महत्व भी रखता है। यह दिन पारिवारिक रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर देता है।

कई स्थानों पर महिलाएँ अपने भाइयों के लिए विशेष पकवान बनाती हैं और मिलजुलकर इस पर्व को मनाती हैं।त्योहार के समापन के साथ ही लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। भाई दूज ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि रिश्तों की मिठास और आपसी प्रेम से ही समाज मजबूत बनता है। भाई-बहन के इस अनोखे बंधन का पर्व हर चेहरे पर मुस्कान और दिलों में अपनापन छोड़ गया।


