एक ओर सरकार बेरोजगारी दूर करने विभिन्न कवायद कर रही है, तो वही नगर निगम, जनप्रतिनिधियों की मनमानी और लापरवाही के चलते बेरोजगार भटकने को मजबूर हैं। स्मार्ट सिटी के तहत बेरोजगारों के लिए गुमटी का निर्माण किया गया था, 4 साल पहले बनाई गई गुमटीयो का आज तक आवंटन नहीं किया जा सका है, जिसके चलते अशोकनगर, मुक्तिधाम चौक के पास रखी गुमटिया जर्जर हो चुकी है ।

फुटपाथ पर व्यवसाय करने वालों को व्यवस्थित जगह और गुमटी देने शासन ने यह योजना शुरू की थी, ताकि वे स्वयं का व्यवसाय स्वयं शुरू कर सके जबकि बेरोजगारों का कहना है कि आवेदन जमा किए 3 साल हो गए हैं, बस निगम हमें घूमा रहा है, और आज तक गुमटी नहीं दिया गया है। वहीं दूसरी ओर आप खुद देख सकते हैं शासन का पैसा किस तरह बर्बाद किया गया है। मुक्तिधाम चौक के किनारे पड़े गुमटियां के अधिकांश पार्ट्स चोरी कर लिए गए हैं। और वही अशोकनगर से बिरकोना जाने वाले मार्ग पर रखी गई गुमटिया तो ढांचे में ही तब्दील हो गई है। रखरखाव और देखरेख के अभाव में बेरोजगारों के लिए बनाई गई गुमटियां सड़ चुकी है। इसका स्वरूप पूरी तरह से ही बदल गया है।

निगम और जनप्रतिनिधियों के आपसी साठगांठ के चलते इसे पात्र को नहीं दिया गया, जिसके चलते इसके अधिकांश पार्टस चोरी कर लिए गए हैं, अब केवल ढांचा ही रह गया है। हजारों रुपए खर्च कर बनाए गए इस गुमटी को बेरोजगारों को आवंटित करना था, ताकि वे एक स्थाई जगह पर अपना रोजगार चला सके। वही निगम अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों अपने चहेतों को गुमटी देने के के चक्कर में तकनीकी समस्या बताते हुए पात्र को आबंटित नही किया, बेरोजगारों को दे दिया जाता तो वे आज अपना व्यवसाय करते। वही अब यह पड़े पड़े सड़ चुके है, अब किसी काम के भी नहीं रहे। जब इस विषय पर निगम अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इससे साफ जाहिर है कि इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं गड़बड़ जरूर है। बेरोजगार युवाओं का कहना है कि हमें दे दिया जाता तो आज हम आत्मनिर्भर होते और शासन के पैसे का सही उपयोग होता।



