
छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया को और सरल एवं डिजिटल बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश में भूमि की रजिस्ट्री के लिए ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में सभी उप-पंजीयकों को आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।आदेश में कहा गया है कि अब भूमि के स्वामित्व, ऋण भार और फसल संबंधी सभी जानकारी ‘भुईयां पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध और मान्य है। रजिस्ट्री के समय पंजीयन अधिकारी ऑनलाइन डाटा मिलान के माध्यम से सभी प्रविष्टियों की पुष्टि करेंगे। इस कारण अब भौतिक ऋण पुस्तिका की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई हैमध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा सहित देश के अधिकांश राज्यों में ऋण पुस्तिका प्रणाली पहले ही समाप्त की जा चुकी है। अब छत्तीसगढ़ ने भी उसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए इसे डिजिटल प्रशासन सुधार का हिस्सा बना दिया है।अब छत्तीसगढ़ में किसानों को भूमि की रजिस्ट्री के लिए ऋण पुस्तिका लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी — पंजीयन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।


