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रथ पर सवार होकर निकले महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, बिलासपुर में रेलवे क्षेत्र से हर वर्ष की भांति विशाल रथ यात्रा निकली।

रविवार को जगन्नाथ पुरी के साथ दुनिया भर में पूरे श्रद्धा भक्ति के साथ रथ यात्रा निकाली गई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को नगर भ्रमण कराया गया। बिलासपुर में भी रेलवे क्षेत्र से हर वर्ष की भांति विशाल रथ यात्रा निकाली गयी।

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विश्व में प्रसिद्ध है। इसे लेकर जनमानस में कई कथाएं प्रचलित है। एक कथा के अनुसार एक बार देवी सुभद्रा ने अपने भाई श्री कृष्णा और बलराम से नगर दर्शन की इच्छा प्रकट की थी जिसे पूरा करने के लिए तीनों रथ पर सवार होकर रथ यात्रा पर निकले थे। दूसरी कथा के अनुसार भगवान जगन्नाथ ने देवी गुंडिचा को हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को उनके घर जाकर आतिथ्य स्वीकार करने का वरदान दिया था, जिसे पूरा करने के लिए वे रथ पर सवार होकर निकलते हैं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ही एकमात्र ऐसे भगवान है जो स्वयं श्रद्धालुओं के बीच पहुंच कर अपने विशाल नेत्रों से उन्हें देखकर अपना आशीर्वाद देते हैं। बिलासपुर में भी 1996 में रेलवे क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ के मंदिर का निर्माण किया गया। यह मंदिर हूबहू पुरी के जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति है , इसलिए यहां भी उन्ही परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। विगत 28 वर्षों की भांति इस वर्ष भी यहां रथ यात्रा निकाली गई। स्नान पूर्णिया पर बीमार हुए भगवान के स्वस्थ होते ही रविवार सुबह नेत्र उत्सव और नवजोबन उत्सव मनाया गया। इसके पश्चात अलग-अलग अनुष्ठान संपन्न किए गए। सुबह पुजारियो द्वारा मंगल आरती, सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा, नवग्रह पूजा पश्चात हवन किया गया। तत्पश्चात् भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को महाप्रसाद अर्पण किया गया। परंपरा अनुसार शुक्ल द्वितीया पर देव प्रतिमाओं को बड़ा श्रृंगार भेषा अर्पित किया गया। मंगल अर्पण और पहंडी भीजे के साथ मदन मोहन का आह्वान किया गया। इस वर्ष यहां छेरा पहरा की परंपरा का निर्वहन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से झाड़ू से मंदिर से लेकर रथ तक के मार्ग की सफाई की। इस दौरान वे इंद्रद्युम्न राजा की भेष में नजर आए। देव प्रतिमाओं को रथ पर सवार कराया गया जिसे देखने हजारों का हुजूम उमड़ पड़ा।

बिलासपुर के रेलवे क्षेत्र में इस बार भी 16 फीट लंबे, 17 फीट ऊंचे और 12 फीट चौड़े रथ पर भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा को सवार करवाने के बाद श्रद्धालुओं ने रथ का रस्सा खींचते हुए उन्हें नगर भ्रमण कराया। यह रथ यात्रा तितली चौक, स्टेशन रोड, तारबाहर, गांधी चौक होते हुए देर शाम जगन्नाथ मंदिर के ही बगल में स्थित उड़िया स्कूल में अस्थाई रूप से निर्मित गुंडिचा मंदिर पहुंची। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ का महा प्रसाद 5 क्विंटल कनिका का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। अपने बीच भगवान जगन्नाथ को पाकर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था और इस विशाल रथ को नर, नारी, बच्चे सभी खींचते हुए हर्ष का अनुभव कर रहे थे। अब आगामी 15 जुलाई तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में ही रहकर मौसी मां का आतिथ्य स्वीकार करेंगे। इस बीच 11 जुलाई को हेरा पंचमी का पर्व मनाया जाएगा तो वहीं 15 जुलाई को बहुड़ा यात्रा निकालकर भगवान को एक बार फिर से मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

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