राष्ट् सेविका समिति बिलासपुर के द्वारा “शबरी के राम” बृहद महिला सम्मेलन का आयोजन

बिलासपुर। राष्ट् सेविका समिति बिलासपुर के द्वारा “शबरी के राम” बृहद महिला सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ उच्चतर माध्यमिक शाला बिलासपुर के मैदान में किया गया। यह कार्यक्रम सायं 4:00 बजे से प्रारंभ हुआ। प्रारंभ मे श्रीरामलला ग्रह संपर्क अभियान के तहत माताओं बहनों के द्वारा प्रभात फेरी के द्वारा तथा घर-घर जाकर अयोध्या में रामलला के दर्शन हेतु निमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया गया, जिसमें माताओं एवं बहनों को संपर्क के दौरान जो अनुभव प्राप्त हुआ उसका मातृशक्तिओ के द्वारा अनुभव बताया गया श्रीमती मंगला देशपांडे,
देविका सिंग, मीनाक्षी, आदि बहनों ने अपना अनुभव साझा किया । अनुभव कथन के पश्चात राष्ट्र सेविका समिति की बहनों के द्वारा घोष का प्रदर्शन किया गया एवं गण समता का, दंड प्रयोग तथा नियुद्ध का प्रदर्शन किया गया। मंच पर आसीन सुश्री सुलभा ताई जी के द्वारा राष्ट्र सेविका समिति के संबंध में उन्होंने सभी को जानकारी प्रदान की एवं उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति की कार्य पद्धति एवं समिति के विवरण के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की। समिति के उद्देश्य के संबंध में उन्होंने अनुशासन समाज जागरण एवं संघटनात्मक कार्य का आधार बताया। उन्होंने सीता और सावित्री का आदर्श बहनों के बीच रखा। आज राष्ट्र को संगठित मातृशक्ति के साहस और त्याग की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर वर्मा जी के द्वारा मंच से कहा शबरी के राम अंतिम इकाई के विषय हैं जब हम सबरी मां का स्मरण करते हैं, तो समाज की अंतिम इकाई का उल्लेख होता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम देश की आत्मा है, देश की पहचान है, राम व्यक्ति की सांसों में बसे हैं। आक्रमणकारिया ने श्री राम मंदिर को ही नहीं अपितु हमारी आस्था को तोड़ा है, उन्होंने बताया कि श्री राम मंदिर के लिए 77 आंदोलन हुए हैं 1990 में प्रथम कारसेवा हुई थी। उन्होंने श्रीराम मंदिर ग्रह संपर्क अभियान का उल्लेख करते हुए बताया, कि श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय संपूर्ण देश ही नहीं अपितु विश्व राममय हो गया। प्रत्येक गांव और नगर में प्रभात फेरी, जन जागरण, सायंकालीन श्री हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन कर समाज में एकरूपता का वातावरण निर्मित हो गया। उन्होंने सभी मात्र शक्तियों से आग्रह किया कि सप्ताह में कम से कम एक दिन संगत करना होगा। एक साथ भजन और भोजन करने से समाज में समरसता आएगी एवं सामाजिक सद्भाव का भाव जागृत होगा। उन्होंने आग्रह किया कि घर से बाहर निकलते वक्त मस्तक पर तिलक लगाकर निकले एवं प्रत्येक घर में रामायण की कम से कम एक दोहे का पाठ होना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में श्रीमती पूनम बघेल बहन जी के द्वारा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सहयोग करने के लिए आभार प्रकट किया गया। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ राजकुमार सचदेवजी, प्रदीप देशपांडे जी, डॉ विनोद तिवारी जी, प्रफुल्ल शर्मा जी, गणपति रॉयल जी, स्वाति गुप्ता, डॉ संजना तिवारी, मीना गोस्वामी, लिली ठाकुर, रमा पांडे, कमलिनी गुप्ता, पूर्णिमा सिंह के साथ- साथ बड़ी संख्या में मात्र शक्तियों उपस्थिति रही

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