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रेलवे की स्वच्छता मुहिम पर सवाल! बुधवारी बाजार में कचरे का अंबार, व्यापारियों और रेलवे की लापरवाही उजागर

रेलवे की स्वच्छता मुहिम कितनी कारगर साबित हो रही है, इसका अंदाजा बुधवारी बाजार के हालात देखकर लगाया जा सकता है। यहां रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में गंदगी का ऐसा आलम है कि आसपास से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ चुकी है।बुधवारी बाजार के प्रमुख हिस्से में व्यापारियों द्वारा रोजाना सड़ी-गली सब्जियां, फल और वेस्टेज खुले में फेंक दिए जाते हैं। इन कचरों के ढेर पर मवेशी चारा खोजते घूमते रहते हैं, जिससे न केवल बदबू और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है बल्कि स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य भी खतरे में पड़ गया है।साफ सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले रेलवे कर्मचारी और अधिकारी भी इस गंदगी पर आंख मूंदे बैठे हैं।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रेलवे के दफ्तरों में स्वच्छता अभियान की रिपोर्ट तो रोजाना बनाई जाती है, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। सफाईकर्मी अक्सर नदारद रहते हैं, और कचरा उठाने की व्यवस्था नाम मात्र की रह गई है। बाजार क्षेत्र में जगह-जगह पॉलिथिन, सब्जियों के अवशेष और प्लास्टिक बोतलें बिखरी रहती हैं, जो रेलवे प्रशासन की लापरवाही का साफ सबूत हैं।लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गंदगी फैलाने वाले व्यापारियों पर जुर्माना लगाया जाए और रेलवे के जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जाए। यदि इसी तरह लापरवाही जारी रही तो बिलासपुर का नाम स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर लाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन हो जाएगा। फिलहाल, रेलवे की स्वच्छता मुहिम कागजों में चमक रही है, लेकिन जमीनी हकीकत बदबू से लथपथ है।

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