
बिलासपुर :- रेलवे ठेका श्रमिक प्रताप बर्मन की मौत के मामले में मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर अमृता बर्मन का परिवार और समर्थक लगातार पांच दिनों से डीआरएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। परिवार का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर उग्र आंदोलन नहीं करेंगे, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर ही न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।धरनास्थल पर बैठे परिजनों ने साफ कहा कि संविधान ने उन्हें सिखाया है कि हक और अधिकार की लड़ाई शांतिपूर्वक तरीके से भी लड़ी जा सकती है। इसी वजह से वे हिंसक प्रदर्शन से दूर रहकर, सिर्फ अपने मांगों पर डटे हुए हैं।धरनास्थल पर पांच दिनों से लगातार डटे लोगों का कहना है कि जब तक मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा और स्थाई नौकरी नहीं दी जाती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कई संगठन भी धरने का समर्थन कर रहे हैं।पीड़ित पक्ष ने कहा कि 23 अगस्त से अस्पताल में भर्ती रहे प्रताप बर्मन के इलाज में न तो ठेकेदार और न ही रेलवे ने मदद की। इसी लापरवाही के चलते परिवार आज सड़क पर बैठा है।धरनास्थल पर माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण है। परिवार और समर्थक साफ कह रहे हैं कि यह आंदोलन संविधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से ही आगे बढ़ेगा।अब सभी की निगाहें 2 सितंबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार को पूरा भरोसा है कि अदालत उनके पक्ष में ही फैसला सुनाएगी।परिजनों ने यह भी कहा कि यदि अदालत का फैसला उम्मीद के विपरीत आता है तो वे और भी बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे, मगर शांतिपूर्ण ही रहेंगे।फिलहाल पांच दिनों से चल रहा यह धरना प्रशासन और रेलवे दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है।अधिकारी लगातार समझाइश दे रहे हैं, मगर परिवार अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।


