लिंगियाडीह में मकान तोड़ने के नोटिस पर 15 दिनों से उबाल, ग्रामीणों का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी, पट्टा होने के बावजूद खाली करने का नोटिस

लिंगियाडीह क्षेत्र में मकान तोड़े जाने की आशंका से पिछले 15 दिनों से ग्रामीणों का निश्चितकालीन आंदोलन जारी है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग एकत्र होकर नगर निगम की कार्यवाही के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में निवासरत हैं और उन्हें पूर्व में पट्टा भी प्रदान किया गया है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा अचानक नोटिस जारी कर मकान खाली करने को कहा जाना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।ग्रामीणों का आरोप है कि निगम की यह कार्रवाई एकतरफा है और वास्तविक स्थिति का सही आकलन किए बिना नोटिस दिया गया है। इसी कारण वे लगातार धरना देकर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनके पास पट्टा है और वे वर्षों से यहां बसे हुए हैं, तो फिर उन्हें उजाड़ने की क्या आवश्यकता है।विरोध के बाद फिलहाल निगम की कार्रवाई रुकी हुई है और मामला ठंडे बस्ते में दिखाई दे रहा है, लेकिन फिर भी क्षेत्रवासियों के मन में आशंका बनी हुई है। उनका कहना है कि जब तक इस मामले का स्पष्ट और स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उन्हें यथास्थान बसाया जाए और उनके आवास को किसी भी तरह की क्षति न पहुंचे।लिंगियाडीह के लोगों का यह संघर्ष न केवल आवासीय अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि उनके भविष्य की सुरक्षा का भी सवाल है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे अपने आशियाने को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और समाधान मिलने तक शांतिपूर्वक आंदोलन जारी रखेंगे।

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