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लोकसभा चुनाव क्षेत्र बिलासपुर में दोनों पार्टी के पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के बीच होगा मुकाबला, कांग्रेस ने भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव को बनाया अपना उम्मीदवार।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी ओबीसी का मामला उठाया था। इसको लेकर जमकर चर्चा भी हुई। ओबीसी की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए भाजपा ने लोकसभा चुनाव में पिछले दो चुनावों की तरह एक बार फिर से पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। ओबीसी वर्ग के लोरमी के पूर्व विधायक तोखन साहू को उम्मीदवार बनाया है। वही भिलाई के देवेंद्र यादव को कांग्रेस उम्मीदवार बनाया है।

बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सामान्य होने के बाद लगातार कांग्रेस सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को मैदान में उतारती रही है, लेकिन जीत नहीं मिली। इसलिए इस बार कांग्रेस ने भी ओबीसी के उम्मीदवार पर दांव खेला है। कांग्रेस ने बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसलिए लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टी के पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। जिसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। बिलासपुर लोकसभा में भाजपा के तौखन साहू का मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार देवेन्द्र यादव के बीच होगा।

लोकसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है।, यादव, पटेल, कौशिक, वर्मा, मानिकपुरी, केवट, श्रीवास, निषाद, कश्यप, जायसवाल, सोनी और देवांगन समाज के मतदाता ओबीसी वर्ग में आते हैं। साथ ही लोकसभा में सामान्य वर्ग, एससी और एससी वर्ग के मतदाता भी हैं। जो आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लोकसभा में साहू और यादव मतदाता करीब बराबर है। इसलिए चुनाव दिलचस्प होगा।कांग्रेस उम्मीदवार देवेंद्र यादव भिलाई विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री रहे कद्दावर भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडे को दूसरी बार चुनाव में हराया है। 25 वर्ष की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के महापौर बनने का खिताब देवेंद्र यादव को मिला है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में देवेंद्र यादव ने अहम भूमिका निभाई थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को एकतरफा जीत मिली थी। उनके उम्मीदवार अरूण साव 1 लाख 41 हजार 763 वोट से चुनाव जीते थे। उनको चुनाव में 6 लाख 34 हजार 559 बोट मिले थे। वहीं दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अटल श्रीवास्तव को 4 लाख 92 हजार 796 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा ने कांग्रेस के उम्मीदवार को 12.72 प्रतिशत अधिक वोट अर्जित कर चुनाव हराया था।अब दोनों प्रत्याशी ओबीसी के हैं, लिहाजा इस बार चुनाव दिलचस्प होगा।

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