
नेशनल हाईवे सहित प्रदेश की सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े और बढ़ते हादसों को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जनहित याचिका और नई हस्तक्षेप याचिका में बिलासपुर से जांजगीर तक मवेशियों की तस्वीरें पेश करते हुए एनएचएआई पर सुरक्षा की कमी और टोल वसूलने की आलोचना की गई।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि सड़क पर मवेशियों के बैठने के लिए आम लोग भी जिम्मेदार हैं। वहीं, राज्य सरकार ने नए मुख्य सचिव की जॉइनिंग का हवाला देते हुए जवाब के लिए समय मांगा।हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वे दो हफ्ते में व्यक्तिगत शपथपत्र देकर सड़कों पर मवेशियों के बढ़ते खतरे और सुरक्षा उपायों की जानकारी दें। सुनवाई में यह भी स्पष्ट किया गया कि जनहित याचिकाओं के तहत सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।मामले की सुनवाई लगातार जारी है और हाईकोर्ट ने राज्य और एनएचएआई को सावधानीपूर्वक रिपोर्ट पेश करने के लिए निर्देशित किया है, ताकि सड़कों पर दुर्घटनाओं और मवेशियों के खतरे को कम किया जा सके।


