सभा प्रस्ताव का आरोप,रेत घाट की लीज रद्द करने की मांग की। नियमों के उल्लंघन का आरोप, ग्रामीणों ने चेताया—निर्णय वापस न हुआ तो होगा घेराव।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हाल ही में जिले के विभिन्न रेत खदानों के लिए जारी की गई निविदा प्रक्रिया पूरी कर नीलामी के माध्यम से खदानों का आवंटन किया गया है। हालांकि इस आवंटन के बाद अब स्थानीय ग्रामवासियों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में ग्राम कोनचरा के ग्रामीणों ने रेत घाट की स्वीकृति को तुरंत निरस्त करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि उनका ग्राम पंचायत अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां पर पेसा एक्ट लागू है। ऐसे में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि के लिए ग्राम सभा की वास्तविक सहमति आवश्यक होती है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत द्वारा जो प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, उसका कोरम आज तक पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद स्वीकृति प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि ग्राम जारगा में भी नीलामी प्रक्रिया के तहत रेत घाट स्वीकृत किया गया है, जबकि दोनों घाटों के बीच की दूरी एक किलोमीटर से भी कम है, जो नियमों के स्पष्ट उल्लंघन को दर्शाता है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि फर्जी ग्राम सभा के प्रस्तावों के आधार पर शासन को गुमराह कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है।ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि रेत खदान की स्वीकृति तत्काल प्रभाव से निरस्त नहीं की गई, तो वे कलेक्ट्रेट और खनिज विभाग का घेराव करने पर मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों से पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, इसलिए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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