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सोमवार को डूबते सूर्य को छठवृतियों ने दियाअर्घ्य, मंगलवार को उगते सूरज को अर्थ देने के साथ होगा छठ पूजा का समापन

सनतान परंपरा में छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन दर्शन, आत्मशुद्धि और सामाजिक सामंजस्य का महोत्सव है. छठ व्रत सूर्योपासना और षष्ठी देवी की आराधना का अद्वितीय संगम है. छठ पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्राकृतिक आराधना व मूर्तिपूजा नहीं बल्कि सूर्य और जल की उपासना है. राजा चार दिवस से इस पर्व के तीसरे दिन डूबते सूर्य को छठवतियों ने अर्घ्य दिया।

स्मोकर पर बिलासपुर में भी विभिन्न स्थानों पर छठ वृत्तियों के द्वारा सूर्य देव की पूजा अर्चना की गई। हिंदू मान्यता के अनुसार सूर्यदेव की आराधना से कर्ण का जन्म हुआ. द्रौपदी ने सूर्यदेव से अक्षयपात्र प्राप्त किया.लोक परंपरा चार दिनों का विधान है जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य लोकगीत, आस्था और सामाजिक एकता इस व्रत को जन-जन का महापर्व बना देते हैं.

सनातन धर्म में उषा और प्रत्युषा को सूर्य की पत्नियां माना जाता है, जो सूर्य की शक्तियों के स्रोत हैं; उषा सूर्य की पहली किरण का प्रतिनिधित्व करती हैं और प्रत्युषा अंतिम किरण का, जो क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त को दर्शाती हैं. उषा एक वैदिक देवी हैं जिनका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है और वह सूर्योदय की देवी हैं, जबकि प्रत्युषा गोधूलि या संध्याकाल की देवी हैं, जो शाम की अंतिम किरणों का प्रतीक हैं. लिहाजा चार दिवस से इस पर्व के तीसरे दिन छठ व्रत के द्वारा डूबते सूर्य को अर्ध दिया गया। इस मौके पर बिलासपुर में भी विभिन्न स्थानों पर छत रतियों के द्वारा डूबते सूर्य को अर्थ देने के साथ उनसे परिवार में सुख समृद्धि की कामना की गई हालांकि आता है

बाहर बिहार उत्तर प्रदेश में हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन अब पूरे भारतवर्ष में पहले उत्तर भारतीय लोगों के द्वारा इस पर्व को धूमधाम से मना कर परिवार में सुख समृद्धि की कामना छठी मैया से की जाती है। छठ पर्व के संबंध में एक कथा स्कंद देवता के जन्म से जुड़ी हुई है. गंगा देवी ने एक स्कंधाकार बालक को जन्म लिया, जिसे सरकंड के वन में छोड़ दिया. उस वन में छः कृतिकाएँ निवास करती थीं. उन सभी ने स्कंध का लालन-पालन किया. इसी कारण ‘स्कंध’ नाम पड़ा. ये कृत्तिकाएँ कार्तिक की षष्ठमाताएँ कहलायी, जिन्हें इस ‘छठ माता’ या ‘षष्ठी मईया’ कहते हैं ।लिहाजा उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही इस चार दिवसीय पर्व का समापन होगा।

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