स्मार्ट सिटी की राशि का दुरुपयोग जो पहले दिन से जारी था वह आज भी है। कुछ नया और बेहतर करने की जगह वही पुरानी चीजों को तोड़कर नया परोसने का सिलसिला जारी है। ताजा मामले में कलेक्टोरेट के अंदर स्थित विश्राम स्थल को तोड़कर नया उद्यान बनाया जा रहा है। यही नहीं, यहां महात्मा गांधी की दांडी यात्रा की प्रतिमा भी लगेगी। इसके लिए 93 लाख रुपए का टेंडर ठेकेदार आनंद बुधौलिया को दिया गया है। 4 महीने में काम पूरा करने का वर्क आर्डर भी जारी कर दिया गया है। इसके लिए राशि जिला खनिज न्यास से स्वीकृत हुई है तो निर्माण एजेंसी स्मार्ट सिटी है।



कलेक्ट्रेट प्रवेश करते ही मुख्य मार्ग पर आवेदकों के बैठने के लिए कॉन्क्रीट की कुर्सी बनाई गई थी, जिसे तोड़कर अब वहां गार्डन बनाया जा रहा है, जिसमें लैंडस्कैपिंग ,बैठने की दो गाज़ीबो, वॉटरफॉल होगा। वही फाउंटेन भी कलेक्ट्रेट आने वाले का मन मोहेगा, प्रमुख आकर्षण में यहां दांडी मार्च की प्रतिमा लगाई जाएगी, यह पूरा काम स्मार्ट सिटी द्वारा डीएमएफ फंड से किया जा रहा है। तिरानबे लाख में निर्माण कार्य चार माह में पूरा होना है।ठेकेदार ने बताया नामांकन के कारण काम रोकने की बात कही थी, बुधवार से काम शुरू किया गया हैं, जिसे निर्धारित समय में पूरा कर लिया।



गौरतलब हैं कि स्मार्ट सिटी को अपने अधूरे कामों को जून तक पूरा करना है। इसके बाद केन्द्र सरकार द्वारा दी गई राशि लैप्स हो जाएगी। अधिकारियों का ध्यान सैकड़ों करोड़ों के अधूरे पड़े कामों पर नहीं है, वही ठेकेदार को नया काम दे दिया गया है। वह भी कुछ बेहतर और नया हो तो शहर विकास दिखाई दे लेकिन करोड़ों रुपए यूं ही फूंके जा रहे हैं। पुराने स्थान पर ही बिना तोड़े निर्माण कराया जा सकता था, लगता है कमीशन के खेल में ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने नया काम शुरू किया गया है। सभी का ध्यान निर्माण कार्य पर है लेकिन काम के औचित्य पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है, बनाने तोड़ने के खेल से ही ठेकेदार और स्मार्ट सिटी के अधिकारी लाल हो रहे हैं। लोगों का मानना है जो पहले जो था वही बेहतर था, फिर नया निर्माण क्यों किया जा रहा है, जो समझ से परे है।





