मंगलवार को हनुमान जन्मोत्सव का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बिलासपुर के सभी प्राचीन और नवीन मंदिरों में समारोह आयोजित हुए। इसी कड़ी में हटरी चौक स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में भी सुबह से लेकर रात तक भक्तों का जमावड़ा देखा गया।

बिलासपुर में कई प्राचीन और नवीन हनुमान मंदिर है, जिन पर भक्तों की गहरी आस्था है। इन्हीं में से एक है हटरी चौक स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर। हनुमान जयंती पर यहां सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। प्रति मंगलवार और शनिवार को भी यहां बड़ी संख्या में हनुमान भक्त पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। बताया जाता है कि यहां हनुमान जी के दिन की शुरुआत चाय नाश्ता के साथ होती है। यहां स्थित हनुमान जी चाय पीते हैं, जिसके बाद उनकी पूजा अर्चना और श्रृंगार होता है, और वे भक्तों को दर्शन देते हैं। यहां भक्त नियमित पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। अगर वे किसी मंगलवार या शनिवार को नहीं आ पाए तो अगले मंगलवार या शनिवार को उस दिन का नारियल अर्पित करते हैं। करीब 155 साल पुराने इस हनुमान मंदिर में स्वयंभू हनुमान जी विराजमान है। बताया जाता है कि साव परिवार को स्वप्न में आदेश मिलने के बाद मंदिर का निर्माण किया गया था।

यही पास में स्थित बावली कुआं में भगवान बजरंगबली की प्रतिमा मिली थी, जिसके बाद उन्हें पास ही में मंदिर निर्माण कर स्थापित किया गया। वर्तमान में सेवादारों की छठवीं पीढ़ी पूजा अर्चना कर रही है। जिनका मानना है कि यहां मनोकामनाएं लेकर आने वालों की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती है। इस अनोखे मंदिर में भगवान को सबसे पहले सुबह चाय नाश्ता दिया जाता है, जिससे उनके दिन की शुरुआत होती है। भगवान को इमरती और तांबूल की भी सेवा दी जाती है। यहां भक्त पीपल के पत्ते पर श्रीराम लिखकर हनुमान जी पर अर्पित करते हैं। मंदिर के पुजारी मनीष पाठक ने बताया कि यह बिलासपुर का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो रात 12:00 बजे तक खुला रहता है। रात 12:00 के बाद मंदिर के कपाट बंद होते हैं । सेवादार संजू महाराज ने बताया कि भगवान यहां बाल स्वरूप में विराजमान है। दक्षिण मुखी होने से इसकी महिमा और बढ़ जाती है। असल में माता सीता की तलाश में हनुमान जी दक्षिण दिशा में गए थे और सफल हुए थे, इसलिए दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर को विशेष फलदाई माना जाता है। हनुमान जयंती पर यहां हजारों की संख्या में हनुमान भक्त पहुंचे, जिन्होंने नारियल और प्रसाद अर्पित कर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर यहां भंडारे का भी आयोजन किया गया।



