जेल में अपहरण, बलात्कार और पास्को एक्ट के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो कैदीयों को 21 अप्रैल 2023 को 12 दिनों के लिए पेरोल पर छोड़ा गया था, जो आज तक जेल वापस नहीं आये. मामले मे सिविल लाइन पुलिस नें एक साल बाद दोनों बंदीयों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

रायगढ़ निवासी चंद्रकांत निषाद और परेश्वर सारथी के खिलाफ वर्ष 2019 मे कोतवाली थाने मे अपहरण, बलात्कार और पास्को एक्ट का मामला दर्ज हुआ. जहाँ से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. 17 जनवरी 2022 को अतिरिक्त सत्र न्यायधीश की कोर्ट नें दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा से दण्डित किया. 30/1/22 को दोनों बंदीयों को केंद्रीय जेल बिलासपुर ट्रांसफर किया गया. दोनों बंदी चंद्रकांत निषाद और परेश्वर सारथी नें अधिवक्ता के माध्यम से कलेक्टर के समक्ष 12 दिनो के लिए सामान्य अस्थाई मुक्ति का आवेदन लगाया. जिस पर रायगढ़ कलेक्टर नें दोनों बंदीयों को शर्तो के आधार पर रिहा करनें का आदेश दिया. 26/4/23 को चंद्रकांत निषाद और परेश्वर सारथी जेल से बाहर निकले जिन्हें 09/05/23 तक वापस जेल आना था, जो वापस ना आकर फरार हो गए. सिविल लाइन पुलिस नें जेल अधीक्षक के द्वारा सूचना दिये जाने पर दोनों बंदीयों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।


जेल अधीक्षक नें दोनों बंदीयों के वापस नहीं लौटने पर मई 2023 को ही सिविल लाइन थाने मे सूचना दे दी थी. लेकिन तत्कालीन थानेदार नें अपराध दर्ज करना छोड़,यह कहकर वापस कर दिया कि घटना स्थल रायगढ़ है. जबकि जेल मैनुअल के अनुसार बंदी कही से भी फरार हो, अपराध जेल के निकट थानें मे दर्ज होगा. बहरहाल एक साल देर से ही सही सिविल लाइन पुलिस नें मामला दर्ज कर लिया है।




