बिलासपुर के हेमू नगर मुर्रा भट्ठा रोड में मां तारा सार्वजनिक पूजा उत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन संपन्न।

मां तारा बिलासपुर के हेमू नगर मुर्रा भट्ठा रोड में मां तारा सार्वजनिक पूजा उत्सव का दो दिवसीय आयोजन मंगलवार को सम्पन्न हुआ। हर वर्ष चैत्र अमावस को यह आयोजन किया जाता है। आयोजन के दूसरे दिन मां तारा को अन्नकूट का भोग लगाकर भक्तों के बीच वितरित किया गया।

बिलासपुर के हेमू नगर मुर्रा भट्टा रोड में विगत 5 वर्षों से सार्वजनिक तारा माँ पूजा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष भी दो दिवसीय मां तारा पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव का आयोजन तारा मां पूजा उत्सव समिति द्वारा धूमधाम से किया गया। मां तारा को शमशान की देवी कहा जाता है। साथ ही यह भी माना जाता है की मां मुक्ति देने वाली देवी है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध धर्म में भी मां तारा की पूजा अर्चना की जाती है। कहते हैं गुरु वशिष्ठ ने भी पूर्णता प्राप्त करने के लिए मां तारा की आराधना की थी। मान्यता यह भी है कि राजा दक्ष की एक पुत्री और सती की बहन मां तारा थी। बंगाल में मां तारापीठ में हर वर्ष लाखो श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं। मां तारा को 10 महाविद्या में द्वितीय महाविद्या माना जाता है। मां तारा तारने वाली देवी है, अर्थात ये भक्तों को पार लगाती है । बंगाल में मां तारा पूजा उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस परंपरा का पालन बिलासपुर में रहने वाले प्रवासी बंगाली भी करते हैं, जिनके द्वारा इस भव्य पूजा उत्सव का आयोजन किया गया।

सोमवार से इस पूजा उत्सव का आरंभ हुआ, जहां मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ देवी की पूजा अर्चना की गई तो वहीं द्वितीय दिवस अन्नकूट महोत्सव मनाया गया, जहां देवी को बासंती पुलाव, आलू दम और बूंदी का महा प्रसाद अर्पित कर उसे भक्तों में वितरित किया गया। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने कतार में लग कर मां का यह प्रसाद ग्रहण किया। हर वर्ष चैत्र मास में इसी भांति मां तारा की पूजा अर्चना की जाती है, जिसमें शामिल होने दूर-दूर से श्रद्धालु पंडाल में पहुंचे। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष इतिमय गांगुली, अरुण कुंडू, ज्योतिर्मय पाल, पल्लव धर, डॉ हेमंत चटर्जी, अधीर गोलदार, शिबू बोस, असीम दास गुप्ता, संजय अग्रवाल , अनूप गोलदर वरुण नाग चौधरी, असित मिश्रा, ज्योतिर्मय पाल, देवाशीष गांगुली, अर्पित सेनगुप्ता, रूपा पाल, चंद्रानी भट्टाचार्य, रुम्पा कुंडू, शोभा कुंडू ,वंदना नाग चौधरी, मीता पाल, उमा दास गुप्ता, शिखा नियोगी, केया डे आदि का योगदान रहा।

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