Homeहमर बिलासपुरचैत्र नवरात्रि के अवसर पर भक्तगण डबरीपारा स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में...

चैत्र नवरात्रि के अवसर पर भक्तगण डबरीपारा स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में जा रहे हैं जो रोगों से मुक्त करने हेतु प्रसिद्ध है; यहां नारियल बांधकर मनोकामना मांगने की विशेष परंपरा है।

नवरात्रि चल रही है देवी मंदिरों में मां की पूजा अर्चना की जा रही है माता का हर दिन अलग-अलग श्रृंगार किया जा रहा है सुबह से शाम तक भक्ति पूजा अर्चना और ज्योति कलश के दर्शन करने आ रहे हैं हर दिन हम आपको भी किसी एक विशेष मंदिर के दर्शन कर रहे हैं इसी क्रम में आज चलते हैं मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर।

डबरीपारा स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर रोगों से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है सिम्स समेत अन्य अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के प्रिज्म यहां मन्नत के नारियल बांधने आते हैं। और फिर अस्पताल से छुट्टी के बाद उसे खोलने आते हैं। दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के सेवादार ने बताया कि 25 साल पहले उनके दोस्त सुरेश कश्यप को खदान में पत्थर मिला था जो देखने में देवी के रूप में दिख रही थी। कश्यप इस मूर्ति को शहर लेकर आए। उन्हें दिखाया एवं महीने तक माँ की स्थापित करें या नहीं इस पर सभी के बीच चर्चा चलती रही। तब तक प्रतिमा उनके ही घर में रखी थी। इसके बाद सभी दोस्तों ने उन्हें स्थापित करने का निर्णय लिया। एक महीने बाद सिम्स के पीछे दक्षिणेश्वरी मां काली की स्थापना हुई। पूजा अर्चना शुरू की गई। सेवादार भंडारी ने बताया कि कुछ दिन बाद कारीगर बुलाकर मूर्ति को मां का स्वरूप दिया गया। इसके बाद मां काली की बड़ी मूर्ति और गेट पर शेर की प्रतिमा बनाई गई।

भक्तों की आस्था माता के प्रति बढ़ने लगी। धीरे-धीरे मंदिर ने स्वरूप ले लिया है। सेवादार के अनुसार 25 साल पहले जब चैत्र नवरात्रि में ज्योति जलाने की इच्छा हुई थी तो मंदिर में कोई व्यवस्था नहीं थी। टेंट लगाकर पहली बार पांच ज्योत हम दोस्तों ने जलाई थी। इसके बाद लोग जोत जला रहे हैं। वर्तमान में 200 से अधिक ज्योत मंदिर में जल रहे है। सेवादार ने बताया कि जब सिम्स अस्पताल बन रहा था तो वहां बहुत से भगवान की मूर्ति थी जिसे हटाया जा रहा था। उन सभी मूर्तियों को दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में स्थापित किया गया है। यहां प्रतिदिन पूजा अर्चना हो रही है। उन्होंने बताया कि इसके बाद मंदिर में शनि देव की स्थापना की गई। मां के बगल में छोटी माँ, मंझली माँ, शीतला माता की स्थापना की गई। अब मां तारा की स्थापना चैत्र पूर्णिमा को होगी। जयपुर से मूर्ति आ रही है।

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