हाई कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को उसलापुर रोड महावीर नगर के सामने स्थित आसमा बिल्डर के प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सीमांकन का कार्य राजस्व की टीम एवं नगर पालिका बिलासपुर की टीम के द्वारा किया गया। जिसमें राजस्व निरीक्षक हल्का पटवारी नगर निगम की पटवारी नगर निगम के अभियंता सीमांकन कार्य में उपस्थित थे। छठवीं बार हुए सीमांकन में आसमा बिल्डर्स ने चांदा मुनारा से सीमांकन, नाप जोक करने कहा, जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश किया जाएगा, कोर्ट के निर्देश पर आगे की कार्यवाही करने की बाद निगम अधिकारी कह रहे है।


राजस्व की टीम मंगलवार को महावीर नगर से उसलापुर ओवरब्रिज के बीच खसरा नंबर 1552 और इससे लगी विवादित जमीन का छठवीं बार सीमांकन करने पहुंची। इससे पहले भी टीम सीमांकन के लिए गई थी, लेकिन बगैर सीमांकन के पंचनामा तैयार करने पर विवाद हुआ था। राजस्व विभाग के पटवारी और आरआई पिछले साल भर से सीमांकन कर रहे हैं। दरअसल सीमांकन को लेकर यहां लंबे समय से विवाद चल रहा है। यही कारण है कि सीमांकन पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए राजस्व विभाग जिम्मेदार है। पटवारियों को कभी चांदा-मुनारा नहीं मिलता तो कभी दस्तावेज नहीं मिलता। दो बार तो बगैर सीमांकन के ही पंचनामा तैयार कर दिया था।

विवाद की स्थिति इसलिए बन रही है कि राजस्व, पीडब्ल्यूडी और निगम के पास मौजूद दस्तावेज अलग-अलग हैं। ज्ञात हो कि 39 साल पहले 1984 में महावीर नगर मोड़ से उसलापुर ओवरब्रिज तक खसरा नंबर 1552 में रेलवे लाइन के लिए 30 फीट जमीन छोड़ी गई थी। पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग का अमला यहां रेलवे लाइन के लिए छोड़ी गई जमीन से 30 फीट छोड़कर मकान या दुकान निर्माण करने की अनुमति देता था।

निगम, पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में अलग-अलग है। इसके चलते ही सीमांकन में विवाद की स्थिति बनती है। वर्तमान अभिलेख में मौका नाप के अनुसार मौके में पाया गया कि अभी तक भूमि खसरा नंबर 1552 रकबा 4.5400 में शासकीय भूमि दर्ज है। हाई कोर्ट ने आसमा बिल्डर एवं कॉलोनी के प्रकरण में सीमांकन चांदा मुनारा से करने का निर्देश दिया था, जिसमें तहसीलदार के निर्देशानुसार राजस्व निरीक्षक द्वारा सतीश कुमार, मनीष लोहारानी, प्रतीक कुमार गुप्ता तथा अजय अश्वनी प्रशांत योगेश गंभीर के जमीन के नाप जोख की गई, सूचना देकर सीमांकन किया गया।



