रेलवे स्टेशन में रेलवे के अधीन रहकर वर्षो से अपना जीवन यापन करने वाले कुलियों के जीवन पर अब भी ग्रहण मंडरा रहा है। कोरोना के बाद से आज तक पाई पाई को मोहताज कुली सरकार से अपना घर बार परिवार चलाने उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर उन पर ध्यान देने की गुहार लगा रहे है। 1 मई मजदूर दिवस के दिन एक तरफ देश, प्रदेश से लेकर बिलासपुर जिले भर में मजदूरों के लिए तरह तरह के आयोजन कर उनका सम्मान किया जा रहा था। तो वहीं कुछ ऐसे मजदूर भी है जो कोरोना के बाद से रेलवे के सामने मजबूर है। जो लंबे समय से सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे है। बावजूद इसके अबतक इनकी ओर ना ही केंद्र सरकार का ध्यान गया ना ही रेल प्रशासन और ना ही राज्य सरकार का। हम बात कर रहे है बिलासपुर जोनल स्टेशन में वर्षो से कार्यरत सैकड़ों कुलियों की। जो रेलवे के अधीन कार्य कर अपना घर बार चलाने के लिए पूरी तरह से रेलवे के ऊपर निर्भर है।



जिनमे पुरुष के साथ महिला कुली भी शामिल है। कुलियों की माने तो कोरोना के बाद से उनके लिए अबतक ऐसा कोई खास अवसर नही आया जिसको ये लोग सेलिब्रेट कर सकें। बड़े मुश्किल से इनका रोजी रोटी निकल पाता है और इनके परिवार को निवाला नसीब हो पाता है। कभी कभी ये लोग खाली हाथ बगैर कमाए वापस लौट जाते है। कुली संघ की ओर से अपनी हक की लड़ाई लंबे समय से लड़ी जा रही है यह लोग रेल प्रशासन और केंद्र सरकार से लड़ाई लड़ने के अलावा रेल रोको आंदोलन तक कर चुके हैं बावजूद इसके अब तक ना तो केंद्र सरकार ने ध्यान दिया, ना ही रेल प्रशासन ने और ना ही राज्य सरकार ने। सभी कुलियों का कहना है कि कम से कम केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन इनके रोजी रोटी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था का इंतेजाम करे। जिससे इनका परिवार चल सके।


रेलवे जिस तरह से अलग-अलग कामकाज का हवाला देकर ट्रेनों को रद्द कर रहा है वाकई वो दिन दूर नही जब रेलवे स्टेशन में ट्रेन के साथ कुली भी लुप्त होने लगेंगे। यह एक गम्भीर विषय है मजदूर दिवस के अवसर पर कुलियों ने जी न्यूज के जरिये अपनी मांगे केंद्र और रेल प्रशासन के समक्ष रखी है, कोरोना काल से परेशान कुली अब भी सरकार और रेलवे से उम्मीद लगाए बैठें है कि देर से ही सही लेकिन एक दिन कुलियों के हक में सरकार जरूर अच्छा निर्णय लेगी।



