सरकंडा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक के मौत से गुस्साए सर्व आदिवासी समाज ने सोमवार को एसपी से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्यवाही करने की मांग की। समाज के लोगों ने एएसपी को ज्ञापन सौंपते हुए 15 दिनों के भीतर ट्रेनी डीएसपी पर कार्यवाही करने को कहा, अन्यथा उग्र प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी गई। हेड कांस्टेबल के सुसाइड का मामला गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां मृतक के परिवार वाले मौत का जिम्मेदार सरकंडा थाने में पदस्थ ट्रेनी अफसर को बता रहे हैं तो वहीं अब तक पुलिस कार्यवाही नहीं होने से सर्व आदिवासी समाज भी पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित नजर आ रहा हैं यही वजह रही की सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते और पदाधिकारी ने सोमवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर एसपी से मुलाकात कर मौत का जिम्मेदार सरकंडा थाने में पदस्थ प्रशिक्षु डीएसपी के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने की मांग की। समाज के लोगों ने कहा कि अभी तो वे शांतिपूर्ण तरीके से एसपी से मुलाकात करने ही पहुंचे हैं।उन्होंने कार्यवाही के लिए पुलिस प्रशासन को 15 दिनों की मोहलत दी है। अगर इन 15 दिनों के भीतर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हुई तो सर्व आदिवासी समाज सड़क पर उतरकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करेगा।

वहीं एडिशनल एसपी उमेश कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक लखन मेश्राम सरकंडा थाने का कर्मठ और जिम्मेदार प्रधान रक्षक थे। उन्होंने जिस तरह से सुसाइड किया है उसको लेकर अपने पुलिस विभाग में शोक की लहर है एसपी रजनीश सिंह ने सुसाइड मामले में जांच के लिए एएसपी, सीएसपी सहित अन्य टीम का गठन किया है जल्द जल्दी वे इस मामले की जांच पड़ताल कर खुलासा करेंगे।

बहरहाल प्रधान आरक्षक के सुसाइड स्थल पर किसी तरह का कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने पर यह मामला पूरा पूरी तरह से पेचीदा हो गया है। परिवार और समाज की ओर से पुलिस विभाग पर लगातार आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।हालांकि अबतक कोई निष्कर्ष नही निकला है।एसपी ने भी जांच दल का गठन कर मामले की जांच की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी है। वहीं अब तो सर्व आदिवासी समाज ने भी आंदोलन करने की ठान ली है। यही वजह है कि समाज के लोगों ने पुलिस विभाग को 15 दोनों का मोहलत दिया है। अगर 15 दिवस के भीतर पुलिस विभाग कार्यवाही नहीं करती है तो समाज के लोग पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे। इधर यह जानकारी भी मिल रही है कि मृत प्रधान आरक्षक को माल खाने की जिम्मेदारी दी गई थी और माल खाने से कई कीमती सामान पिछले थानेदार अपने घर ले गए थे, जिन्हें वापस लाने के लिए प्रशिक्षु आईपीएस दबाव बना रहे थे। चूंकि हवलदार की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे पूर्व थानेदार से वह सामान वापस मांग सके इसीलिए उन्होंने मजबूरी में यह कदम उठाया होगा।


