इमलीपारा रोड चौड़ीकरण का विरोध शुरू हो गया है, बस स्टैंड के व्यापारियों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि हमें नोटिस नहीं दिया गया है लिखित में कोई जानकारी भी नहीं दिया गया है और निगम दुकान तोड़ने पहुंच गया है, व्यापारियों का कहना है कि जब कोर्ट ने 15 दिन का समय दिया है तो वही निगम मंगलवार को अमले सहित कब्ज तोड़ने पहुंच गया, व्यापारियों का कहना है कि क्या निगम कोर्ट से बड़ा हो गया है। बिना व्यापारियों के विस्थापन के उन्हें हटाया जाना न्याय उचित नहीं है।



पुराना बस स्टैंड से अग्रसेन चौक जाने वाली सड़क पर यातायात दबाव को कम करने के लिए इमली पारा रोड को बाईपास की तरह इस्तेमाल करना है। लेकिन इसके मुहाने पर मौजूद 86 दुकान इसमें बाधक बन रहे थे। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब इन 86 दुकानों को हटाने की तैयारी है, जिन्हें कॉम्प्लेक्स बनाकर बसाया जाएगा। मंगलवार को निगम की टीम दुकान से कब्जा हटाने पहुंची, जिसका विरोध व्यापारियों ने किया, विवाद बढ़ता देख निगम की टीम वापस लौट गई है, वही व्यापारी लाम बंद हो गए हैं, व्यापारियों का कहना है कि उन्हें 4 बाई 4 का पुराना बस स्टैंड में दुकान दिया जा रहा है जो कि कांग्रेस भवन के लिए पहले से अलाट है। जिस पर विवाद चल रहा है। ऐसे विवादित स्थान पर हमें दुकान आवंटित किया गया है। व्यापारी उचित व्यवस्थापन और लिखित सूचना के बाद कब्जा हटाने पर अड़े हैं।

गौरतलब हैं कि हाईकोर्ट ने व्यापारियों की याचिका पर जारी स्टे को खत्म करते हुए याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही व्यापारियों की कब्जे वाली 86 दुकानों को तोड़ने का आदेश भी दिया है। ध्यान रहे कि इमलीपारा रोड के मुहाने पर निर्मित इन दुकानों को हटाने के खिलाफ वहां के व्यापारियों, नागरिकों की ओर से पांच याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। इस पर कई सालों से स्टे था। फैसले के बाद व्यापारियों को निगम के समक्ष 15 दिनों के अंदर आवेदन करना होगा।



निगम उनके व्यवस्थापन पर फैसला लेगा। ध्यान रहे कि अभी लोगों को पुराना बस स्टैंड की ओर आने के लिए सत्यम चौक से अग्रसेन चौक जाना पड़ता है। दोनों चौक में ट्रैफिक सिग्नल है। इसके कारण लोगों को यहां रुकना पड़ता है। समय भी अधिक लगता है। अक्सर जाम की नौबत रहती है। इमलीपारा सड़क बन जाने से इससे काफी राहत मिलेगी। नगर निगम ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा कि दुकानों के व्यवस्थापन के लिए किनारे 9.99 करोड़ की लागत से कमर्शियल कांप्लेक्स बनाने की योजना बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बनाई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निगम के पक्ष में फैसला दिया है।


