टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन को हर तरीके से बदला है। तकनीक की मदद से हमारे कई काम बहुत आसान हो गए हैं और जिंदगी में आमूलचूल परिवर्तन आ गया है, मगर यह तकनीक अपने साथ कई खतरे भी लेकर आई है। इनमें साइबर फ्रॉड सबसे अहम है, जिसे इस टेक्नोलॉजी के दम पर ही अंजाम दिया जाता है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर सेबी रजिस्टर्ड एक्सपर्ट ने प्रेस क्लब पहुंचकर पत्रकारों से वार्तालाप किया।

बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों को जानकारी देते हुए सेबी रजिस्टर्ड एक्सपर्ट विपिन डिक्सेना और विवेक राठौर ने बताया कि साइबर धोखाधड़ी भारत में एक गंभीर मुद्दा बन गया है। इसलिए ऑनलाइन दुनिया में किसी भी प्रकार के फाइनेंसियल ट्रांजेक्शन करते समय हमें बहुत सावधान रहने की जरूरत है। डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौरान इन तरीकों से आपके साथ ठगी हो सकती है। समझाते हैं कि कैसे सावधान रहकर आप अपने काम निपटाते हुए साइबर फ्रॉड से भी बचकर रह सकते हैं। इनवेस्टमेंट के लिए ऑनलाइन सुविधाएं आने के साथ ही अपराधियों को भी मौका मिल गया है। वह हाई रिटर्न का लालच देकर आपको ऐसी स्कीम में फंसाते हैं,जहां पैसा डूबने की ज्यादा आशंका होती है।कई कंपनियां तो निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए ऑफिस भी खोल लेती हैं।काफी पैसा इकठ्ठा होते ही ये कंपनियां ऑफिस बंद कर भाग जाती हैं। इसलिए यदि कोई आपको ऐसी स्कीम के बारे में बताए जहां रिटर्न बैंक और एनबीएफसी से ज्यादा हो तो साफ मना कर दें। उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड के लिए अपराधी ईमेल, मैसेज या वेबसाइट बनाकर ऐसा दिखाने की कोशिश करते हैं कि वो वैध कंपनी या व्यक्ति हैं। लोग इनके झांसे में आकर अपनी जानकारी लीक कर देते हैं और धोखे के शिकार हो जाते हैं। देश में इस तरह के फिशिंग स्कीम बहुत तेजी से सामने आए हैं।


ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में लोग ऑनलाइन फ्रॉड में फंसते चले जाते है। जब तक उन्हें ठगी का एहसास होता है तब तक उनके साथ फ्रॉड हो चुका होता है। ऐसे में सायबर फ्रॉड के बारे में आपका जागरूक रहना बहुत जरूरी है। आजकल ब्लाग, न्यूजलेटर और सायबर एक्सपर्ट से जानकारी लेकर अवेयरनेस बढ़ा सकते है।गौरतलब है कि आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जहां लोगों को किसी गलत लिंक पर क्लिक करने या किसी गलत ऐप डाऊनलोड करने की वजह से उनके अकाउंट से पैसे दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाते हैं। अगर आपके साथ कभी ऐसी घटना हो जाए तो घबराएं नहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 1930 नंबर पर डायल कर फौरन इसकी सूचना दें।


