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सामाजिक संस्था पुनः हरियाली द्वारा बिलासपुर शहर को हरा-भरा और वृक्षारोपण जैसे विशेष विषय पर विचार मंथन कार्यक्रम का आयोजन।

शहर के सामाजिक संस्था पुनः हरियाली ने एक बार फिर विचार मंथन कर बिलासपुर को हरा भरा और मनुष्यों के साथ पशु-पक्षियों के रहने लायक बनाने पर ठोस निर्णय लिया।

मनुष्य भी अजीब प्राणी है, जो आग लगने पर ही कुआं खोदने का जतन करता है । हर साल जैसे ही गर्मी की तपिश असहनीय हो जाती है तो लोगों को याद आता है कि पेड़ लगाने चाहिए थे। जब पेयजल संकट गहराता है तो याद आता है कि वाटर हार्वेस्टिंग की आवश्यकता है, लेकिन फिर जैसे ही बारिश आ जाती है, लोग सब कुछ भूल कर अपनी दिनचर्या में खो जाते हैं । इस साल बिलासपुर और आसपास तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। हवा में नमी न होने से लोगों ने तपिश और भी गहरी महसूस की। जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर सामाजिक बैठकों में वृक्षारोपण और वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया जाने लगा। इसी संदर्भ में इस रविवार को शहर के एक निजी होटल में सामाजिक संस्था टीम पुनः हरियाली द्वारा बैठक लेकर आने वाले बरसात के मौसम बड़ी संख्या में पौधे लगाने और भूमिगत पानी के स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया गया। संस्था ने कहा कि बड़े पैमाने पर पौधारोपण हो या फिर रेनवाटर हार्वेस्टिंग इसकी सफलता बिना आम लोगों और शासन प्रशासन के सहयोग के संभव नहीं।

बढ़ती गर्मी ने सबको एहसास करा दिया है कि इससे मुक्ति का एकमात्र उपाय अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। गर्मी बढ़ने पर लोग एयर कंडीशनर ले आते हैं जिससे वातावरण में और गर्मी बढ़ती है ।अर्थात एयर कंडीशनर गर्मी का इलाज नहीं है ।इसके लिए तो अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाने ही होंगे। इन दिनों लोगों के पास पर्याप्त जगह नहीं होती इसलिए वे चाह कर भी अपने घर पर बड़े पेड़ नहीं लगा पाते। ऐसे में शहर के सभी खाली पड़े स्थानो में यथासंभव पेड़ लगाने पर जोर दिया गया। पुनः हरियाली संस्था ने कहा कि पशु पक्षियों का प्राकृतिक आवास पेड़ पौधे ही हैं। पेड़ पौधों के संरक्षण के साथ हम जीव जगत का भी संरक्षण कर पाएंगे। गर्मी के इस मौसम में मानवता का परिचय देते हुए घर के बाहर और छत पर पशु पक्षियों के लिए पानी रखना, उनके लिए दाना, भोजन की व्यवस्था करने घर से निकलने वाले सब्जी और फलों के छिलके आदि को उन्हें खाने के लिए देने पर यहां सहमति बनी।

टीम पुनः हरियाली ने बैठक कर इस बात पर जोर दिया कि खुशहाली वही है, जहां हरियाली है। इसके लिए आगामी दिनों में किए जाने वाले आयोजनों को लेकर सुझाव आमंत्रित किए गए तो वहीं विद्वानों ने अपने विचार भी रखें। संस्था द्वारा आगामी दिनों में अलग-अलग स्थानो पर वृक्षारोपण किया जाएगा साथ ही आम लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि यह धरती आने वाली पीढ़ी के लिए भी रहने योग्य बनी रहे।

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