अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन के लिए अच्छी खबर है। जंगल के अंदर 400 जल स्रोतों में पानी है। यह जल स्रोत प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों हैं। इन स्रोतों में पानी जिस स्थिति में है, उससे माना जा रहा है कि मानसून आने तक इनमें से एक भी नहीं सूखेंगे और न ही वन्य प्राणियों को प्यास बुझाने के लिए जंगल से बाहर आना पड़ेगा। हाल ही में अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोर और बफर दोनों क्षेत्र में सर्वे कराया गया। इसमें मैदानी अमला के अलावा अधिकारी भी शामिल रहे। उन्हें विशेष तौर पर निर्देश दिए गए थे। दरअसल टाइगर रिजर्व के अंदर बाघ, तेंदुआ, बाइसन, चीतल से लेकर कई प्रजाति के वन्य प्राणी है। संरक्षित क्षेत्र होने के कारण इन बेजुबानों के लिए आहार से लेकर पानी तक सभी इंतजाम करने की जवाबदारी टाइगर रिजर्व प्रबंधन की है। इसलिए प्रबंधन पूरी चिंता के साथ इनका इंतजाम करता है।



जंगल के अंदर प्राकृतिक जल स्रोत है और कृत्रिम जल स्रोत भी है। सर्वे के दौरान इन दोनों स्रोतों को देखा गया। 914.017 वर्ग किमी के क्षेत्र में एक-एक जल स्रोतों को बारीकी से देखा गया। उनमें कितना जल है, उसकी तस्वीर भी ली गई। इसके अलावा लोकेशन भी दर्ज किया गया। इसके बाद रिपोर्ट बनाई गई। इसमें 400 जल स्रोतों में पानी होने की पुष्टि हुई है। जल स्रोतों की इस स्थिति को देखकर प्रबंधन ने राहत की सांस भी ली। उनका मानना है कि मानसून आने में अब अधिक समय नहीं है। मानसून तक इन स्रोतों में पानी रहेगा। बरसात की दस्तक के साथ जल संकट भी दूर हो जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि जल स्रोतों की मानिटरिंग अचानकमार टाइगर रिजर्व के निदेशक मनोज पांडेय और उप निदेशक गणेश यूआर कर रहे हैं। यहीं कारण है कि इस पर वन्य प्राणियों को प्यास बुझाने के लिए इधर- उधर नहीं भटकना पड़ा। सर्वे कराने के पीछे एक उद्देश्य यह भी है कि जल स्रोतों की ताजा स्थिति पता चल जाती है। यदि किसी में कम पानी है तो उसके लिए कार्ययोजना बनाकर यह व्यवस्था की जाएगी कि मानूसन का पानी भर जाए और अगली बार ग्रीष्मकालीन सीजन में इन जल स्रोतों में पर्याप्त पानी रहे, ताक वन्य प्राणी प्यास बुझा सके।



