शहर के हर चौक चौराहों पर कंपनी की हर पुरानी बाइक और कारों को बेचने का कारोबार चल रहा है। जिनके पास ना तो शोरूम है और ना ही ऑफिस। यहां तक कारोबार करने के लिए निगम द्वारा जारी गुमास्ता लाइसेंस भी नहीं है। और ना ही ये निगम को किसी प्रकार का टैक्स देते हैं। पुरानी गाड़ी बेचने के साथ ही बीमा और नाम ट्रांसफर भी खुद ही करते हैं। जिला प्रशासन, नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ किसी विभाग ने आज तक इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की और ना ही किसी वाहन के दस्तावेजों की जांच की और ना ही प्रशासन के पास इनकी मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम है।

इतना ही नहीं निगम या अन्य किसी विभाग के पास तो ऐसा कोई आंकड़ा ही नहीं है। जिससे यह पता चलता हो कि शहर में कितने लोग सेकंड हैंड गाड़ी का कारोबार कर रहे हैं। सड़क पर कारोबार करने से दूसरी समस्या यातायात की भी है। सड़कों पर ही पुरानी गाड़ियों को लोडिंग अनलोडिंग की जाती है। शहर में धीरे-धीरे चारों तरफ यह कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है।



