ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिंहा के निर्देशानुसार और औचित्यहीन लंबित प्रकरणों का भौतिक सत्यापन, निराकृत प्रकरणों का डिजिटल माध्यम से स्कैनिंग के बाद भौतिक सत्यापन और हाई कोर्ट भवन की आधारभूत संरचना के नवीनीकरण के काम चल रहे हैं। उल्लेखनीय है की उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार औचित्यहीन लंबित प्रकरणों को चिन्हित करने की प्रणाली विकसित हुई है। ताकि ऐसे लंबित प्रकरणों को सुनवाई के पश्चात निराकृत किया जा सके। चीफ जस्टिस रमेश सिंहा के निर्देशानुसार रिट, क्रिमिनल अपील, क्रिमिनल रिवीजन, अवमानना प्रकरणों और अन्य प्रकरणों में औचित्यहीन लंबित प्रकरणों का चिन्हांकन कर सूचीबद्ध किया जा रहा है। प्रकरणों का भौतिक सत्यापन जिला न्यायालय बिलासपुर रायपुर और दुर्ग में पदस्थ 40 न्यायिक अधिकारियों और उच्च न्यायालय स्थापना में पदस्थ लगभग 36 अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। उक्त कार्य के 21वें दिन 6 जून को सीजे जस्टिस रमेश सिन्हा द्वारा वीसी के माध्यम से इन कार्यों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।


