शिक्षा विभाग में पदोन्नति और संशोधन के मामले में शासन ने जांच के आदेश देते हुए, एससीईआरटी में अतिरिक्त संचालक जेपी रथ को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग में 2144 शिक्षकों की पदोन्नति के बाद नियम विरुद्ध तरीके से लेन-देन करते हुए मनचाहे स्थान पर संशोधन आदेश जारी कर दिया था। मामले में चारो संभाग में संयुक्त संचालक और 10 से अधिक अफसरों को निलंबित किया गया था। लोकसभा चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही अब चारों संभाग में सहायक संचालकों को इस मामले से जुड़े दस्तावेजों का प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है।

कांग्रेस शासन काल में शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति और प्रमोशन में बड़ा घोटाला सामने आया था। 2144 शिक्षकों की पदोन्नति और संशोधन आदेश जारी करने के एवज में करोड़ रुपए के लेनदेन की शिकायत शासन तक पहुंची। इसके बाद दर्जनभर अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। अब सरकार बदलने के बाद फिर से दोबारा जांच हो रही है, इस मामले में अब उन सभी शिक्षकों को सरकारी गवाह बनाया जाएगा जिसे जिसे पदोन्नति और संशोधन के लिए लेनदेन की गई थी, इसके अलावा उन शिक्षकों से भी पूछताछ होगी जिन्होंने संशोधन के दौरान आरोप लगाए थे, अब इन सभी शिक्षकों की बारी-बारी से जांच और पूछताछ होगी, इसके साथ ही प्रमोशन के दौरान संभागों में जिन अधिकारी कर्मचारियों की टीम बनाई गई थी उनकी भी जांच होगी।

दरअसल, शिक्षा विभाग में पदोन्नति और संशोधन की गड़बड़ी की शिकायत सबसे पहले जीपीएम के सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र राय और वर्तमान कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने सचिव स्तर के अधिकारियों से लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री से की थी। इसके बाद मामले में शासन ने बिलासपुर दुर्ग रायपुर और सरगुजा संभाग में हुई पदोन्नति और संशोधन के मामले की जांच के निर्देश दिए ,कई अफसर पर संशोधन की आड़ में करोड रुपए की लेनदेन के गंभीर आरोप भी लगे थे, बिलासपुर संभाग की बात करें तो यहां 3500 से अधिक पद रिक्त थे, इसमें ई संवर्ग में 778 और टी सवर्ग मिलाकर कुल 1063 पदों पर पद्गति के बाद संशोधन हुआ था।


