साइंस कॉलेज मैदान की डेडलाइन तो वैसे 11 माह की थी, लेकिन नगर निगम ने आठ माह में ही काम पूरा करने का दावा किया था. विलंब होने की स्थिति में दिसंबर 2018 तक काम पूरा होने की बात कही गई थी लेकिन इस प्रोजेक्ट को 7 साल हो गए. अब तक काम अधूरा है. नगर निगम ने अपना काम लगभग पूरा कर लिया है, पीडब्ल्यूडी के हिस्से का काम ऑडिटोरियम अभी भी अधूरा है।

दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर साइंस कॉलेज मैदान को बनाया जा रहा है. सार्वजनिक सभा स्थल और ऑडिटोरियम कार्य के लिए दो-दो निर्माण एजेंसीयों को ठेका दिया गया. फिर भी प्रोजेक्ट अधूरा है. 11 माह में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट 7 साल में भी पूरा नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि निगम के हिस्से का काम पूरा हो गया है. लेकिन पीडब्ल्यूडी के हिस्से का काम अब भी अधूरा है. आज स्थिति यह है कि उद्घाटन होने से पहले ही साइंस कॉलेज मैदान बदहाल हो गया है. यहां किए गए निर्माण कार्य में बड़ी-बड़ी दरारे है, इससे निर्माण की गुणवत्ता की पोल खुल गई है।



पीडब्ल्यूडी ने समय पर काम नहीं किया, इसलिए अब निर्माण कार्य कि लागत बढ़ गई है. PWD नए एस्टीमेट के साथ काम करना चाहता है. जिसको स्वीकृति नहीं मिल पा रही है. शहर के लोगों को सभा, सम्मेलन, खेलकूद एवं सामाजिक सांस्कृतिक एवं राजनीतिक आयोजन के लिए यहाँ 25 एकड़ मे मैदान को तैयार किया जा रहा था. देखरेख के अभाव मे निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का काम अटक गया है. अब बिल्डिंग भी ख़राब होने लगी है. जिस पर निगम और PWD के अधिकारियों नें पानी फेर दिया है. किसी भी सभा समारोह के दौरान किसी भी वीआईपी के आवागमन में दिक्कत ना हो इसका यहां पूरा ख्याल रखा गया है. मगर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के द्वारा निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने के कारण इस प्रोजेक्ट का काम ठंड पड़ गया है।


