नए क़ानून के तहत पीड़ितों को सहायता प्रदान करने और न्याय सुनिश्चित करने हेतु महिला पुलिस अधिकारियों की होगी प्राथमिकता।

नए कानून मे महिलाओं और किशोर-किशोरियों की सुरक्षा के लिए संबंधित अपराध में सख्ती की गई है। अब दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध की जांच महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर करेंगी। पॉक्सो एक्ट मामले मे जांच की जिम्मेदारी भी महिला पुलिस अफसर को सौंपी है। इसलिए महिला बल कि कमी दूर करनें व्यवस्था बनाई जा रही है।

देश में 1 जुलाई से नया कानून लागू हो गया है। धाराए बदलने के साथ ही इसमें कई प्रावधान किए हैं। अब महिला-बच्चों के केस में बिना थाने जाए ई एफआईआर होगी। नए क़ानून मे महिलाओं और किशोर-किशोरियों से संबंधित अपराध की सजा में सख्ती की गई है। जाँच को लेकर महिला प्रधान आरक्षक से लेकर महिला इंस्पेक्टर और डीएसपी रैंक के अधिकारियो की जिम्मेदारी तय कि है। अब दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध मे जांच की जिम्मेदारी महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर की रहेगी. इसके लिए महिला बल की कमी दूर करने आईजी डॉ संजीव शुक्ला नें कहा है कि सभी थानों मे महिला जाँच अधिकारियो की पोस्टिंग के साथ ही, बल की कमी से निपटने, एक सब डिवीजन बनाकर तीन थानो के बीच एक महिला सब इंस्पेक्टर की तैनाती की गयी है।

नए क़ानून के तहत पीड़ितों को सहायता प्रदान करने और न्याय सुनिश्चित करने के लिये महिला पुलिस अधिकारियों का होना महत्त्वपूर्ण है. आईजी नें पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर बिलासपुर रेंज के लिए ASI से लेकर महिला पुलिस अधिकारियो की संख्या बढ़ाने मांग की है।

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