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परिसीमन के विरोध के लिए कांग्रेस की 21 सदस्यीय टीम का गठन, वार्डों में रायशुमारी के बाद की जाएगी आपत्ति।

नगरीय निकाय चुनाव से पहले बिलासपुर में किए गए परिसीमन का कांग्रेसियों ने विरोध करने का निर्णय लिया है। इसके लिए महापौर समेत 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो 22 जुलाई से पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर दावा आपत्ति करेंगे।

बिलासपुर में नगरीय निकाय चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दरअसल बिलासपुर के 70 वार्ड में कहीं-कहीं जनसंख्या औसत से बहुत अधिक है तो वहीं कुछ वार्डो का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। सभी वार्डो में औसत जनसंख्या 7000 के करीब करने के उद्देश्य से वार्डो का क्षेत्रफल बदला गया है, इसके परिसीमन के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे 60 वार्डों के नक्शे बदल जाएंगे। बड़े वार्डो की अतिरिक्त आबादी छोटे वार्डों में शिफ्ट की जाएगी। नोटिफिकेशन जारी करने के बाद 22 जुलाई तक दावा आपत्ति मंगाई गई है। सभी जोन कार्यालय में नया नक्शा निरीक्षण के लिए लगाया गया है, इसके लिए जोन 2 और 3 में दावा आपत्ति जमा की जा सकती है। परिसीमन के बाद बिलासपुर के अधिकांश वार्ड की सीमा बदल जाएगी। बिलासपुर की 38 और बेलतरा विधानसभा के 18 वार्ड इससे प्रभावित होंगे। इस परिसीमन से बिल्हा और तखतपुर के 10 वार्डो पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इधर कांग्रेस का आरोप है कि बंद कमरे में भाजपा पार्षदों को लाभ दिलाने के मकसद से यह बदलाव किए गए हैं। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों ने कांग्रेस के परंपरागत वोटरों को एक वार्ड से हटाकर दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। इसे लेकर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा नए वार्ड परिसीमन की जांच के लिए 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी के सदस्य वार्डों में जाकर कांग्रेस पार्षद या पार्षद प्रत्याशियों और वरिष्ठ कांग्रेस जनों से रायशुमारी के बाद परिसीमन में हुई कथित त्रुटि की रिपोर्ट 19 जुलाई तक जिला कांग्रेस कमेटी के पास जमा करेंगे और फिर 22 जुलाई से पहले दावा आपत्ति पेश किया जाएगा।

इस कमेटी में महापौर रामशरण यादव के अलावा पूर्व विधायक शैलेश पांडे, नगर निगम सभापति शेख नजीरुद्दीन, पूर्व महापौर राजेश पांडेय, शहर उपाध्यक्ष राकेश शर्मा, महेश दुबे, जुगल किशोर गोयल सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी शामिल है, जिनका आरोप है कि इस परिसीमन से कांग्रेस को नुकसान होगा।

वैसे तो प्रदेश सरकार को अधिकार होता है कि वह आवश्यकता अनुसार चुनाव से पहले परिसीमन करें। कांग्रेस ने भी किया था लेकिन विपक्ष के नाते सरकार के हर फैसले का विरोध करना उनका धर्म है, शायद कांग्रेस इसी राजधर्म का पालन कर रही है।

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