मोहभट्टा स्थित शराब फैक्ट्री से प्रदूषण के मामले में शनिवार को हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। तो वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी इस संवेदनशील मामले में जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है, भाटिया वाइन फेक्ट्री का मामला सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया है तो वही सरकार अब करवाई करने की बात कर रही है।

जिन देशों में नदी को सिर्फ नदी माना जाता है वहां की नदियां तो बेहद साफ है लेकिन जिस देश में नदी को मां और देवी का दर्जा हासिल है वहां कुछ लोभी और जन विरोधी उद्योगपतियों के कारण नदी बुरी तरह से प्रदूषित हो रही है। मोह भट्ठा स्थित भाटिया शराब फैक्ट्री इसका जीवंत उदाहरण है। तमाम एजेंसियों को दरकिनार कर यहां फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले केमिकल को सीधे शिवनाथ नदी में प्रवाहित किया जाता है , जिससे नदी का पानी जहरीला होता जा रहा है। इसी का असर है कि यहां नदी में मौजूद लाखों मछलियां और अन्य जल जीव मर गए। साथ ही नदी का पानी पीकर 15 से 20 गायों की भी मौत हो गई। आसपास के ग्रामीण और जनप्रतिनिधि डर और लालच की वजह से भले ही खामोश रह जाए लेकिन इस पूरे मामले को अब हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया है।


हाई कोर्ट चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले में मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। इस पूरे मामले में आबकारी, पर्यावरण विभाग के मुख्य सचिव, मुंगेली कलेक्टर, एसपी, आबकारी उपयुक्त समेत सात लोगों को पक्षकार बनाया गया है। इसकी अगली सुनवाई सोमवार 22 जुलाई की होगी। आरोप है कि भाटिया वाइंस फैक्ट्री से निकलने वाली घटिया क्वालिटी की स्प्रिट को सीधे शिवनाथ नदी में बहाया जा रहा है इस वजह से नदी का पानी इतना जहरीला हो चुका है कि इसमें मौजूद कोई भी जीव जिंदा नहीं बचा। इधर विश्व हिंदू परिषद की शिकायत पर सरगांव पुलिस ने एनीकेट में मिले गाय के शव का पोस्टमार्टम कराया है, साथ ही खजरी में जमा जहरीले पानी का सैंपल भी लिया गया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री तोखम साहू ने भी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने अल्प प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में जी न्यूज़ से चर्चा के दौरान बताया कि जिस प्रकार से भाटिया वाइन फैक्ट्री से घटिया स्प्रिट निकलने से 15 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं, मछलियों, मवेशियों की मौत हुई है और वहां के खेत किसान सब बर्बाद हो गए है, इसे लेकर जल्द ही जांच कर कार्यवाही की जाएगी। मंत्री ने कहा मामला सरकार की संज्ञान में है जो भी दोषी होगा उसे पर कार्यवाही की जाएगी।

गौरतलब हैं कि भाटिया वाइन्स से निकलने वाली जहरीली स्पिरिट के दुर्गंध और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था। इसमें मोहभट्टा, खजरी, धूमा के ग्रामीण शामिल थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों के सामने भाटिया वाइन्स के प्रबंधकों को गंदा पानी बाहर छोड़ने से मना किया था। अफसरों की समझाइश के बाद लोगों ने मतदान किया। मतदान नहीं करने पर प्लांट प्रबंधन और स्थानीय नेताओं से भी धमकियां ग्रामीणों को मिली थीं। इधर, समझाइश के बाद अफसरों ने दोबारा इस ओर रुख करने की जरूरत नहीं समझी। नतीजा यह कि शिवनाथ में इतनी गंदगी फैल गई कि मवेशी और मछलियां मरने लगीं। मामला सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और सरकार भी अब जांच के बाद कार्रवाई की बात कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्र में विनाश की कीमत पर विकास नहीं चाहिए। भाटिया वाइंस फैक्ट्री की गड़बड़ियों से पूरा इलाका परेशान है, लेकिन बाहुबलियों के डर के कारण कोई आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पाता। यह मामला भी कई दिनों से सामने आ रहा था लेकिन स्थानीय लोग इस पर कुछ भी कहने से की हिम्मत नहीं जुटा पाए। वह तो किसी बाहरी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया जिससे पूरा मामला उजागर हुआ।

इस पूरे मामले को रफा दफा करने के लिए फैक्ट्री संचालक ने मजदूर लगाकर नदी में मरी मछलियों को भी साफ कर दिया ताकि किसी को कोई खबर ना लगे। ऐसा भी नहीं है कि स्थानीय ग्रामीणों ने इस जानलेवा फैक्ट्री की शिकायत कभी ना कि हो। फैक्ट्री से उठने वाली असहनीय दुर्गंध, इसकी वजह से स्थानीय लोगों में होने वाली आंख और त्वचा की जलन की समस्याओं को लेकर महिलाओं ने 31 मई 2023 को पर्यावरण विभाग से इसकी शिकायत की थी। 18 अप्रैल 2024 को भी दूसरी शिकायत की गई, लेकिन विभाग ने पानी का सैंपल लेकर इतिश्री कर लिया, जिसके कारण इतनी बड़ी घटना सामने आई है। अकूत धन दौलत, बाहुबलियों का सुरक्षा चक्र और स्थानीय कुछ नेताओं के संरक्षण से ही यह फैक्ट्री ग्रामीणों के लिए जानलेवा बन रही है। साथ ही देश की धरोहर नदियों को भी प्रदूषित कर रही है, इसलिए इस मामले में त्वरित कार्यवाही की आवश्यकता है।




