झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से मौत के आरोप के 16 दिन बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में कब्र से शव खोदकर बाहर निकाला गया और उसे पोस्टमार्टम कार्यवाही के लिए सिम्स भेज दिया गया। इस दौरान कछार के शमशान घाट में बड़ी संख्या में ग्रामीणो की भीड़ नजर आई।

रमतला में एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के चलते रमतला निवासी दयाल खरे की मौत हो गयी थी।मौत के बाद पोस्टमार्टम कार्यवाही किए बगैर ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। वहीं पति दयाल खरे के मौत के बाद मृतक की पत्नी सुभद्रा खरे ने मौत का जिम्मेदार झोलाछाप डॉक्टर जय भारद्वाज को बताया था। क्योंकि झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा ही बीते 6 जुलाई को दयाल की तबियत बिगड़ जाने के चलते उसके घर जाकर इलाज किया गया था। दयाल को डॉक्टर ने एक के बाद एक लगातार दो बार इंजेक्शन भी लगा दिया था इस वजह से उसके शरीर में रिएक्शन की आशंका जताई जा रही है और मृतक के परिवार द्वारा माना जा रहा है कि इसी वजह से उसकी जान चली गयी।

इस पूरे मामले की जांच पड़ताल के लिए परिवार वाले ने झोलाछाप डॉक्टर के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए आईजी और एसपी को ज्ञापन भी सौंपा था। शायद यही वजह रही की 16 दिन के बाद बिलासपुर तहसीलदार अतुल वैष्णव और कोनी पुलिस के मौजूदगी में कब्र से शव को खोद कर बाहर निकाला गया और फिर उसे पोस्टमार्टम कार्यवाही के लिए सिम्स भेजा गया। तहसीलदार अतुल वैष्णव और कोनी थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

बहरहाल यह तो सच है कि जिस तरह से ग्रामीण अंचलों में डायरिया और मलेरिया ने पांव पसारा है।उसे देखते हुए झोलाछाप डॉक्टर भी सक्रिय हो गए हैं। हालांकि इसे भी नहीं नकारा जा सकता की देर से ही सही लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही करना भी शुरू कर दिया है। इसी तरह सेंदरी,कछार और रामतला में गैरकानूनी ढंग से घर में ही अस्पताल खोलकर क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टरों की खोजबीन की जा रही है। इसी तरह मृतक दयाल खरे के परिवार वालों ने भी रमतला के झोलाछाप डॉक्टर पर दयाल खरे की मौत का आरोप लगाया है। शायद इसलिए ही रविवार के दिन पुलिस एवं प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में शव को कब्र से निकालकर जांच के लिए पोस्टमार्टम के लिए सिम्स भेजा गया है।





