सरस्वती साइकिल योजना के तहत नौंवी की छात्राओं को दिए जाने वाले साइकिल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, छात्राओं ने इसे घटिया क्वालिटी का कहा है, उनका कहना है कि कुछ दिन बाद इस साइकिल के सारे सामान पुर्जे खराब हो जाते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा अच्छी गुणवत्ता की खरीदी के निर्देश दिए जाते हैं लेकिन शिक्षा विभाग और ठेकेदारों की मिली भगत से छात्राओं को घटिया साइकिल वितरित की जा रही है।

सरस्वती साइकिल योजना के तहत कक्षा नवी में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल दी जाती है, जिसकी गुणवत्ता को लेकर हमेशा से सवाल खड़े होते रहे हैं। नए सत्र में फिर से छात्रों को साइकिल देने की तैयारी की जा रही है।



छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप साइकिल दी जाती है ताकि स्कूल से दूरी पर रहने वाली छात्राएं भी स्कूल जाने से वंचित न हो और अपनी शिक्षा पूर्ण कर सके। लेकिन खरीदी एजेंसी शिक्षा विभाग और ठेकेदार की मिली भगत से छात्राओं को दी जाने वाली साइकिल गुणवत्ता विहीन है। इसे लेकर छात्राओं ने आरोप लगाया है। उनका कहना है जब सरकार हमें साइकिल दे ही रही है तो विभाग को चाहिए कि उसके सामान और कल पुर्जे अच्छे हो कुछ दिनों बाद ही सामान खराब होने लगते हैं।


सरस्वती साइकिल योजनाओं के तहत सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीपीएल श्रेणी के नीचे रहने वालों बच्चियों को निशुल्क साइकिल दी जाती है और वही एसटीएससी के सभी छात्राओ को साइकिल वितरण की जाती है, शासन छात्रों को शिक्षा से जोड़ने अभिनव पहल किया है लेकिन साइकिल के पार्ट्स उपलब्ध कराने वाली कंपनियां घटिया क्वालिटी की कल पुर्जे सामान दे रही है। जिससे साइकिल की गुणवत्ता को लेकर हमेशा छात्राएं शिकायत कर रही है अगर इसकी जांच की जाए तो बहुत बड़ी गड़बड़ी सामने आएगी।




