एक तरफ जिले में लगातार डायरिया और मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। वहीं शहर के स्लम क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों में अंगद की तरह जमे झोलाछाप डॉक्टरों की लोगों के बीमार पड़ने के चलते जमकर दुकानदारी चल रही है।हालांकि बीते कुछ दिनों में जिस तरह से मलेरिया और डायरिया से मौतें हुई है उसको लेकर निश्चित ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की आंखें खुली और उन्होंने केवल डायरिया और मलेरिया ग्रसित क्षेत्रों में ही झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही किया।


जिस तरह से झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही हुई उससे लगा था कि अब बाकी जगह दुकानदारी चला रहे झोलाछाप डॉक्टर डर से अपना दुकान बंद कर देंगे। लेकिन शायद ऐसा नही हुआ। बल्कि अब भी शहरी क्षेत्र तालापारा, तारबाहर, सरकंडा, सिरगिट्टी से लेकर चुचुहियापारा और नयापारा सहित अन्य क्षेत्रों में इनकी दुकानदारी धड़ल्ले से जबरदस्त चल रही है। जिस तरह से झोलाछाप डॉक्टर अपने घर पर और प्रमुख मार्गों पर खोले गए क्लिनिक पर बेखौफ दुकानदारी कर रहे है उससे तो यही प्रतीत होता है कि इन झोलाछाप डॉक्टरों में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का किसी तरह का कोई डर नही है। फिलहाल देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग शहरी क्षेत्रों के झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कब तक वैधानिक कार्यवाही करेगी।





