सड़क के लिए मांग करते-करते 20 वर्षों का इंतजार खत्म नहीं होने पर परेशान ग्रामीणों ने विरोध का अनूठा तरीका अपनाया। ग्रामीणों ने बरसात के मौसम में दलदल बन चुकी सड़क पर रोपा लगाकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन को आईना दिखाते हुए सड़क की मांग की।

पूरा मामला मस्तूरी विधानसभा के ढेका मानिकपुर से लेकर धुमा तक सड़क निर्माण का है। यहां 2004 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क बनी हुई थी। इसके बाद आज तक उसकी रिपेयरिंग नहीं हुई है। सड़क उखड़ कर मिट्टी की कच्ची सड़क के रूप में परिवर्तित हो चुकी है जो बरसात के समय में कीचड़ से भर जाती है। इस सड़क पर बरसात के समय में चलना दुश्वार हो जाता है। यहां तक की आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के 3 महीने हमें निकलना बड़ा मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार 3 महीने बरसात में कई बार लोग दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। कई के हाथ–पांव टूटे हैं और कई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बरसात के समय स्कूल आने जाने वाले बच्चों को भी इससे तकलीफ होती है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क की मांग को लेकर वे 20 सालों से जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं। इस दौरान तीन से चार बार प्रदेश में सरकार बदल गई और कई कलेक्टर भी आकर चले गए। पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई डामरीकरण सड़क का फिर से निर्माण या मरम्मत नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने चुनाव बहिष्कार भी किया था। पर अधिकारियों ने जल्द ही सड़क बनवाने का झांसा दे उनसे वोटिंग करवा लिया। इसके अलावा कई बार उच्च अधिकारी और नेता उन्हें सड़क बनवाने का आश्वासन दे चुके हैं पर अब तक सड़क नहीं बन पाई है। ग्रामीणों के अनुसार मुख्य सड़क से संपर्क करने के चलते वे इलाज एवं अन्य कामों के लिए समय पर नहीं पहुंच पाते। जिसके चलते उन्हें इलाज भी ठीक से नसीब नहीं होता और उनकी रोजी-रोटी पर भी संकट आ रहा है। स्कूली बच्चे बूढ़े हादसे का शिकार हो जा रहे हैं वह अलग।



20 सालों से लगातार मांग होने के बाद भी सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों ने अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण पुरुषों एवं महिलाओं ने धान की बालियां लेकर दलदल बनी सड़क में रोपा लगाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क में खेतों से ज्यादा दलदल हो चुका है। लगातार बारिश के चलते पानी भी उपलब्ध हो गया है। इसलिए हम प्रशासनिक तंत्र को आईना दिखाने सड़क रूपी दलदल में धान का थरहा रोप रहे हैं और कान बंद कर सोए हुए नेताओं तथा उच्च अधिकारियों तक अपनी मांगों को पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।






