गांधी चौक से लेकर शिव टाकीज चौक तक का एरिया नया जाम जोन बन गया है। दरअसल इस क्षेत्र में आवासीय भूखंड पर कोचिंग सेंटर से लेकर व्यावसायिक काम्प्लेक्स बन गए हैं। इनके पास ना तो पार्किंग की जगह है ना ही व्यवस्था। सड़कों पर गाड़ियां खड़ी रहती हैं।



कोचिंग सेंटर के नाम पर शहर के प्रमुख मार्गों पर अवैध तरीके से व्यवसाय चलाया जा रहा है, जिस कारण शाम के समय तो इस सड़क से निकलना मुश्किल हो जाता है। ना ट्रैफिक पुलिस और ना ही निगम, इस पर ध्यान दे रहा है। बिना अनुमति और नक्शा पास कई दुकान और मकान भी तन गए हैं। इसके साथ ही जो कोचिंग और हास्टल चलाए जा रहे हैं, उनका निगम में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है।

निगम अधिकारी मामले में रिकॉर्ड बनाना दूर यह जानते तक नहीं है कि कहां कितने हास्टल संचालित हो रहे हैं। इन हास्टलों के संचालक ना तो निगम को टैक्स देते हैं और ना ही जीएसटी का भुगतान करते हैं। पिछले 10 सालों से एक एक भी हास्टल और कोचिंग सेंटर वालों ने जीएसटी नहीं पटाया है। अधिकारी भी कभी जांच करने नहीं पहुंचते। शहर जैसे-जैसे शिक्षा का हब बनता जा रहा है, बाहर से आकर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसे देखते हुए अतिरिक्त कमाई के लिए लोग अपने घरों को हॉस्टल का रूप देकर छात्र-छात्राओं को रहने की सुविधा दे रहे हैं। कोचिंग संचालक से जब सुविधाओं के विषय में पूछा गया तो वे अलग ही राप अलापते नजर आए।

इसके साथ ही कोचिंग सेंटर वाले छात्रों से लाखों रुपए की फीस के साथ जीएसटी ले रहे हैं लेकिन इसका टैक्स नहीं पटा रहे हैं। शहर में आवासीय नक्शा पास कराकर कोचिंग और हास्टल के रूप में कुछ लोग जगह का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। इससे उन्हें तो मोटी कमाई हो रही है पर निगम के हाथ कुछ नहीं लगता। दयालबंद टिकरापारा, राजेंद नगर, विनोचा नगर, विद्या नगर, क्रांति नगर, भारतीय नगर, प्रियदर्शिनी नगर, अज्ञेय नगर, नेहरू नगर, नर्मदा नगर, बंधवापारा, कोनी समेत शहर के मध्य और अरपापार सरकंडा समेत अन्य क्षेत्रों में अवैध हॉस्टल की बाढ़ आ गाई है।


