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बिलासपुर छठ घाट पर “नवग्रह वाटिका” की स्थापना करने पर पाटलिपुत्र सांस्कृतिक विकास मंच और भोजपुरी समाज द्वारा किया गया वृक्षारोपण।

सावन के महीने में जगह-जगह वृक्षारोपण किया जा रहा है। इसी क्रम में बिलासपुर छठ घाट पर पाटलिपुत्र सांस्कृतिक विकास मंच और भोजपुरी समाज द्वारा एक पेड़ मां के नाम के साथ ही नवग्रह वाटिका की स्थापना करते हुए नवग्रहो का प्रतिनिधित्व करने वाले पौधे लगाए गए।

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी मनुष्य के भाग्य, जीवन, मृत्यु और सभी कर्मों का निर्धारण नवग्रह करते हैं। इन नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व तरह-तरह के रत्न, धातु, यंत्रों के अलावा पौधे भी करते हैं। क्या आप जानते हैं कि अलग-अलग पौधे अलग-अलग ग्रहों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं ? मान्यता है कि उचित क्रम और स्थान पर इन्हीं ग्रहों से संबंधित पेड़ लगाने से उस स्थान को नवग्रह वाटिका का दर्जा हासिल होता है और ऐसी वाटिका न केवल उस स्थान की महत्ता बढ़ाती है बल्कि जातकों के लिए भी उनकी देखभाल और उपासना शुभ कारी होती है। इसी विचार के साथ इस रविवार को बिलासपुर के छठ घाट में पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच और भोजपुरी समाज द्वारा नवग्रह वाटिका की स्थापना करते हुए उनके प्रतिनिधि पौधे लगाए गए।

इस अवसर पर पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास ने एक पेड़ अपनी मां की स्मृति में भी लगाया इसके साथ ही डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार दास ने सभी को “एक पेड़ मां के नाम” के सराहनीय कार्य में हिस्सा लेने को कहां।

समाज के सदस्यों ने सूर्य का प्रतिनिधित्व करने वाले आक, चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करने वाले पलाश, मंगल का प्रतिनिधित्व करने वाले खैर, बुध का प्रतिनिधित्व करने वाले चिचिड़ा, बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करने वाले पीपल, शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करने वाले गूलर, शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करने वाले शमी, राहु का प्रतिनिधित्व करने वाले दूब और केतु का प्रतिनिधित्व करने वाले कुश के पौधे लगाए। मान्यता है कि नवग्रह वाटिका की स्थापना सभी धार्मिक और यज्ञ स्थलों के आसपास की जाती है। बिलासपुर के छठ घाट में जहां छठ महापर्व का आयोजन होता है, वहीं वर्ष भर यहां सनातन धर्म के सभी अनुष्ठान संपन्न होते हैं। यहां नवग्रह वाटिका की स्थापना से इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है।

सनातन धर्म में ग्रह शांति, यज्ञ आदि के लिए कुछ वनस्पतियों और काष्ठ की आवश्यकता पड़ती है, जो इन पौधों से प्राप्त होते हैं। तो वही इन पौधों की सेवा और पूजा अर्चना करने से भी ग्रह शांति मिलती है। इन पौधों का संग्रह भी आसान नहीं है जिसे पाटलिपुत्र संस्कृतिक विकास मंच द्वारा इकट्ठा किया गया और घाट के प्रवेश मार्ग के पास ही नवग्रह वाटिका की स्थापना की गई। इसके साथ ही यहां एक पेड़ मां के नाम भी लगाई गई। समिति के सदस्यों ने कहा कि केवल पौधारोपण ही नहीं बल्कि इस वाटिका के संरक्षण और पेड़ों की देखभाल की भी पूरी जिम्मेदारी वे लेंगे और नवग्रह का प्रतिनिधित्व करने वाले इन पौधों के वृक्ष बन जाने से पूरे क्षेत्र में यह एकमात्र नवग्रह वाटिका होगी, जिसका धार्मिक और सामाजिक महत्व होगा।

इस अवसर पर समाज के एस के सिंह, अर्जुन सिंह, मुन्ना सिंह, किशन यादव, कोमल प्रकाश यादव, सुधीर झा, धनंजय झा, शशि नारायण मिश्रा, संतोष कुमार झा, दिलीप कुमार श्रीवास, विनोद कुमार सिन्हा, हेमंत झा, सतीश सिंह, चंदन सिंह राहुल शर्मा, जय शुक्ला, रवि मिश्रा, रंजन सिंह, एन ए सिंह, वीरेंद्र कुमार सेन, रमेश श्रीवास, संतोष झा, निर्भय चौधरी, पीसी झा, अरुण कुमार, डॉ कुमुद रंजन सिंह, रूपेश कुशवाहा, सुजीत कुमार सिंह, आशीष चौधरी, राहुल कुमार, सूरज चंद्राप्रकाश, आदित्य शुक्ला, आदित्य सिंह, द्वारिका क्षत्रिय, राम गोस्वामी, निरंजन जी, प्रियांशु सिंह आदि उपस्थित रहे।

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