मलेरिया और डायरिया फैलने के बाद शासन ने झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध अभियान चलाया था लेकिन फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से अब भी लोग जान गवा रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला से एक बार बिलासपुर के कोटा क्षेत्र में फिर सामने आया है, जहां फिर से एक बार झोलाछाप डॉक्टर की वजह से एक युवक की मौत हुई है। अब तक छापामार टीम ने चार क्लीनिक को सील किया है जबकि अब तक जिले में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज के चलते 7 लोगों की मौत हो चुकी है।


बताया जा रहा है कि अब भी जिले में स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई के बावजूद 115 झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डक्टरों के नाम चस्पा कर इनसे इलाज नही कराने की सलाह दी है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से लगातार कार्रवाई के बाद झोलाछाप डॉक्टरो की कमी देखी जा रही थी, लेकिन आज भी ग्रामीण इलाके में उनकी सक्रियता कहीं ना कहीं स्वास्थ्य विभाग को चुनौती दे रही है। ऐसे में अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन पर किस तरह से रोकथाम लगता है और मौत के सिलसिले को रोकता है।





